तर्क पर आधारित कविता कभी मरती नहीं, वह कालजई होती है-डॉ चारण।

श्रीगंगानगर-राकेश मितवा।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गजादान चारण ने कहा है कि कविता कभी मरती नहीं है, क्योंकि वह तर्क पर आधारित नहीं होती। तर्क  तो  होते ही कटने के लिए हैं। वे सृजन सेवा संस्थान की महिला शाखा वामा लेखनी मंच के तत्वावधान में आत्मवल्लभ जैन पब्लिक स्कूल में आयोजित परमजीतकौर ‘रीत’ के सद्य प्रकाशित काव्य संग्रह ‘कुण्डलिया सतसई’ के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब-जब कविता को लय और छंद का साथ मिलता है, वह अपनी पूरी सामथ्र्य के साथ फिर-फिर आती है। आज जब लोग छंद लिखना तो दूर पढऩा भी पसंद नहीं कर रहे हैं, ऐसे में परमजीत कौर ने कुण्डलिया जैसे कठिन छंद को साध कर सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने हिंदी और राजस्थानी साहित्य में कुण्डलिया छंद को लेकर हुए विशद कार्य की विवेचना करते हुए बताया कि कविता सही मायने में तभी कविता होती है, जब उसमें छंद का निर्वाह हो, मुक्तछंद की कविता भी हो तो उसमें लय का होना बहुत जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक एवं साहित्यकार राजेश चड्ढा ने कहा कि ‘कुण्डलिया सतसई’ में विषयों को बहुत गहराई से उठाया गया है और ऐसे विषयों को छेड़ा गया है, जो अमूमन हर किसी की पसंद हो सकते हैं। पुस्तक की कुण्डलिया आप घर-परिवार में बैठकर सबके बीच कह सकते हैं। यह संस्कारों से जुड़ी एक ऐसी पुस्तक है, जिसमें आपको घर-परिवार, रीति-रिवाज और आज का वातावरण सब मिलेगा।पुस्तक पर पत्रवाचन करते हुए वरिष्ठ आलोचक स. भूपेंद्रसिंह ने कहा कि कवयित्री ने छंद का बहुत बारीकी से निर्वाह किया है और इसमें वे सफल रही हैं। भाषा को लेकर वे किसी मोह में नहीं पड़ती और हिंदी के साथ-साथ अन्य क्षेत्रिय भाषाओं के शब्दों का उपयोग भी खुलकर करती हैं।
पत्रवाचन करते हुए युवा कवि डॉ. संदेश त्यागी ने कहा कि आमतौर पर कवयित्रियों में छंदबद्ध कविता की कमी वे महसूस करते रहे हैं, लेकिन इस कमी को परमजीतकौर ने दूर कर दिया है। एक साथ सात सौ दो कुण्डलिया एक ही पुस्तक में देकर उन्होंने कड़ी मेहनत का काम किया है।पुस्तक की रचयिता परमजीतकौर ‘रीत’ ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने पुस्तक के लेखन से लेकर प्रकाशन तक जुड़े रहे।सहयोगियों का आभार भी जताया।इससे पहले युवा कवयित्री ममता आहुजा ने अतिथियों का स्वागत किया। सृजन के अध्यक्ष डॉ. अरुण शहैरिया ‘ताईर’ ने आभार व्यक्त किया। मंच संचालन कवयित्री मीनाक्षी आहुजा ने किया।

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