मुख्य सचिव से मिलकर संयम लोढ़ा ने विभिन्न मुद्दों पर की चर्चा।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
मुख्यमंत्री के सलाहकार और सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने मुख्य सचिव ऊषा शर्मा से मुलाकात के दौरान माउंट आबू के बिल्डिंग बायलॉज़ के नोटिफिकेशन को लेकर भी बात की। उन्होने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेशानुसार जून 2009 में ईको सेंसेटिव जोन के निटिफिकेशन के अनुसार माउंट आबू का जोनल मास्टर और सब जोनल प्लान 2015 में ही लागू हो चुका है। मुख्यमंत्री के प्रयास से इसका बायलॉज 2019 में लागू हो चुका है। इसका एस टू ज़ोन की सीमा का निर्धारण भी 25 अप्रेल, 2022 को हो गया है। लेकीन, इसका गजट माउंट आबू नगर पालिका द्वारा अब तक नहीं निकलवाने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। जिससे माउंट आबू में भवन निर्माण और मरम्मत का कार्य नही हो पा रहे है। लोढा ने सीएस से कहा कि इसका नोटिफिकेशन हो जाने से मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार जोनल मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार माउंट आबू के स्थानीय बाशिंदों के जर्जर भवनों की मरम्मत, रिनोवेशन, पुनर्निर्माण और नवनिर्माण की अनुमति मिल पाएगी। जिससे करीब 35 सालों से भवन निर्माण नहीं होने के बिखर चुके सामाजिक और आर्थिक ताने बाने को पुनर्जीवित करने का प्रयास शुरू हो सकेगा।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति गठित करने का दिया सुझाव।
विधायक संयम लोढा ने सीएस से माउंट आबू में पर्यटकों के आकर्षण को बढाने के लिये डवलपमेंट के प्रोजेक्ट को गति देने को शीघ्र आबू विकास समिति के साथ साथ एक कार्यकारी समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की जाए जिससे माउंट आबू में पर्यटकों के आकर्षण के लिये नियमित रूप से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके। साथ ही लोढा ने स्पोर्ट्स एडवेंचर गतिविधिया भी शुरू की बात कही इस पर मुख्य सचिव ने माउंट आबू को पर्यटन नक्शे में उभारने के लिए और वहां के लोगों को सम्बल देने के लोढ़ा के सुझावों पर शीघ्र अमल का आश्वासन दिया।
पुलिस ने बदनीयती से निर्दोषों को हत्या के मामले में झूठा फंसाया।
विधायक संयम लोढा ने राज्य की मुख्य सचिव ऊषा शर्मा से शासन सचिवालय में मुलाकात कर सिरोही जिले के थाना बरलूट प्रकरण संख्या 48/2018 में हत्या के आरोप में झूठा फंसाये गये लखमाराम देवासी एवं गेमाराम गरासिया के मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर बर्खास्ती के लिए सीसीए नियम 16 अनुशासनात्मक कार्यवाही करने एवं दोनो पीडितों को 10-10 लाख पर मुआवजा देने की बात कही। इस पर मुख्य सचिव शर्मा ने लोढा को समुचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। लोढा ने बताया कि लखमाराम देवासी अभी जमानत पर है और गेमाराम गरासिया अभी भी सिरोही कारागृह में बंद है। लोढा ने मुख्य सचिव से कहां कि अपराध में बिना लिप्तता के पुलिस द्वारा वर्षो जेल में बंद करने से दोनो नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का गम्भीर हनन हुआ है। उन्होंने कहां कि गेमाराम गरासिया हत्या के दिन बाली जेल में बंद था लेकिन उसे महीनों बाद एसओजी द्वारा इसमें फंसाया गया। इससे पहले निर्दोष गिरफ्तार किये गये लखमाराम देवासी के मामले में तीन साल बाद 2021 में पुलिस ने जिला न्यायालय सिरोही में 169 की अर्जी प्रस्तुत कर कहां कि लखमाराम देवासी को गलत गिरफ्तार किया गया है। लोढा ने उन्हें बताया कि लखमाराम देवासी की गलत गिरफ्तारी के खिलाफ 2018 में भी उन्होंने देवासी समाज के लोगो के साथ भाजपा शासनकाल के दौरान बरलूट थाने का घेराव किया था। उन्होंने कहां कि गेमाराम उर्फ गेमला के न्यायिक अभिरक्षा में होने के बावजूद हत्या में फंसाना पुलिस की आपराधिक मानसिकता को प्रदर्शित करता है। पुलिस ने जिस गैर कानूनी तरीके से इसमें काम किया है। उससे समाज में गहरा अविश्वास उत्पन्न हुआ है और यह प्रकट हुआ है कि पुलिस के लिए लोगो के अधिकार व संविधान कोई महत्व नही रखते। इस वर्ष राजस्थान विधानसभा के कार्य संचालन नियम 131 के तहत उनके द्वारा यह मामला उठाये जाने पर भी सरकार ने गलती स्वीकार की थी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए पुलिस उप महानिरीक्षक जैसे अधिकारी से जांच कराने की घोषणा की थी। क्योकि उक्त घटना दिवस पर स्वयं पुलिस अधीक्षक मौके पर आये थे और उनकी लिप्तता से ही यह अपराधिक कृत्य निर्दोष नागरिक के साथ हुआ। लोढा ने मुख्य सचिव से कहां कि नागरिक अधिकारों के हनन के अनेक मामलो में सर्वोच्च न्यायालय ने पीडितो को आर्थिक मुआवजा दिलाया है। पूर्व इसरो वैज्ञानिक नामबी नारायणन को 50 लाख रूपये मुआवजा दिया गया। पुलिस की कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 21 व 22 का घोर उल्लंघन है। सरकार का यह नैतिक दायित्व बनता है कि दो नौजवानों के चार साल की जिदंगी तबाह करने की वह जिम्मेदारी ले। यद्यपि मुआवजे का सीधा अभी तक कोई प्रावधान नही है लेकिन राजस्थान सरकार अपने नागरिकों के हितों के प्रति सजग है अत: राज्य सरकार इस संबंध में मुआवजा जारी करे। लोढा ने मुख्य सचिव को पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा की गई जांच की प्रति देते हुए उनसे कहां कि उनकी रिपोर्ट में सारे तथ्यों का खुलासा हो चुका है। गृह विभाग ने भी पुलिस मुख्यालय से अब तक कार्यवाही नही करने पर जवाब तलब किया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार स्पष्ट है कि गेमाराम की गिरफ्तारी पूरी तरह गलत और बरामदगी एक धोखा है। इसी तरह लखमाराम की बिना साक्ष्य के गिरफ्तारी करना। सहायक निदेशक अभियोजन द्वारा साक्ष्य के संबंध में ठोस राय प्रदान नही करना एवं वास्तविक तथ्य सामने आने के बाद भी विधि सम्मत कार्यवाही पुलिस के द्वारा नही किया जाना प्रमाणित है।

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