संस्कृत अकादमी के शिविर में संस्कृति और संस्कार पर हुआ गहन मंथन, विद्वानों ने विद्यार्थियों को समझाए शब्दों के सही मायने।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान संस्कृत अकादमी, राजस्थान ललित कला अकादमी, राजस्थान सिंधी अकादमी एवं करुणा संस्थान के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय संस्कार-संस्कृति शिविर के दूसरे दिन कई जाने-माने विद्वानों ने छात्र-छात्राओं को संस्कृति और संस्कार के सही मायने बताए।राजस्थान संस्कृत अकादमी के निदेशक संजय झाला ने बताया कि तीन दिवसीय शिविर के अन्तिम दिन कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के उद्बोधन के बाद समापन होगा। अंतिम दिन मीडिया, सोशल मीडिया और युवा विषय पर वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अपने विचार रखेंगे। शिविर का समय सुबह 9.30 बजे से 12.15 बजे तक रहेगा। इस मौके पर गीता और जीवन प्रबन्धन पर कृष्णपाद दास प्रभु, नैतिक मूल्य एवं चरित्र विषय पर शास्त्री कोसलेन्द्र दास और आर्ट ऑफ लिविंग विषय पर एस.पी. पालीवाल ने अपने विचार रखे। राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य शास्त्री कोसलेन्द्र दास ने संस्कार को परिभाषित करते हुए कहा कि किसी भी अशुद्ध पदार्थ को शुद्ध करने की प्रक्रिया को संस्कार कहते हैं। अक्षय पात्र फाउन्डेशन के स्वामी कृष्णपाद दास प्रभु ने गीता और जीवन प्रबन्धन विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि जीवन के सही प्रबन्धन के लिए मन को नियंत्रित करना जरूरी है। जीवन में आप अच्छा चुने, अच्छा सुने और अच्छा देखें। मोटिवेशनल स्पीकर एस.पी. पालीवाल ने जीवन जीने की कला विषय पर काव्यात्मक अंदाज में व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा सोच बदले तो जीवन भी बदल जाता है, जैसा हमने बनाया है वैसा ही हमारा स्वास्थ्य रहता है।

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