हाईकोर्ट में जेईएन भर्ती-2022 परिणाम और उत्तर कुंजी को चुनौती, कर्मचारी चयन बोर्ड को दिया नोटिस।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 
हाईकोर्ट ने कनिष्ठ अभियंता संयुक्त सीधी भर्ती-2022 (जेईएन-2022)के रिजल्ट और उत्तर कुंजी को चुनौती देनी वाली याचिका पर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को नोटिस जारी कर पूछा है क्यों ना इस भर्ती पर रोक लगा दी जाए ? यह आदेश जस्टिस इंद्रजीत सिंह की सिंगल बेंच ने अनुज सोनी और अन्य की याचिका पर दिया।याचिकाकर्ता ने कोर्ट में गुहार लगाई कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने उसके 5 सही उत्तर को गलत ठहराया है। बोर्ड यह नहीं बता रहा कि आंसर क्यों गलत हैं। कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से पुस्तकें भी पेश की गईं।जिसके आधार पर उत्तरों को सही बताया गया। इस पर हाईकोर्ट ने बोर्ड चेयरमैन से एक सप्ताह में जवाब तलब किया है। इस परीक्षा में 1 लाख 35 हजार अभ्यार्थी शामिल हुए थे। याचिका में एडवोकेट राम प्रताप सैनी ने कोर्ट को बताया कि 17 जनवरी 2022 को जेईएन-2022 (सिविल-डिप्लोमा) भर्ती परीक्षा के लिए 1092 पदों की विज्ञप्ति निकाली गई थी। इसके जरिए पीडब्ल्यूडी, वाटर रिसोर्सेस डिपार्टमेंट, पीएचईडी, राजस्थान स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग विभागों में नियुक्तियां होनी थीं। 18 मई 2022 को जेईएन-2022 की परीक्षा हुई। 31 मई 2022 को प्रीलिमिनरी आंसर की जारी की गई। जिससे याचिकाकर्ता को पता लगा कि मास्टर सेट के मुताबिक कई प्रश्न गलत हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपने ऑब्जेक्शंस ऑनलाइन सबमिट किए। जिसमें सवाल नम्बर 5, 59, 80, 87 और 94 शामिल थे। याचिकाकर्ता ने अपने ये 5 सवाल सही बताए और तर्क दिया कि बोर्ड ने गलत ऑप्शन को सही उत्तर माना है। एडवोकेट रामप्रताप सैनी ने बताया इसके बाद कर्मचारी चयन बोर्ड ने 7 जुलाई 2022 को फाइनल आंसर की जारी कर दी। जिसे देखकर पाया गया कि बोर्ड ने ऑब्जेक्शंस के बावजूद प्रश्नों के उत्तर में कोई बदलाव नहीं किया है। याचिकाकर्ता की आपत्ति को बोर्ड ने नहीं माना। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि प्रीलिमिनरी और फाइनल दोनों  उत्तर पुस्तिका की में बोर्ड ने कई प्रश्नों के गलत उत्तर दिए और कुछ में ऑप्शंस भी बदल दिया जोकि सही दर्शाया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से सही किए गए 5 प्रश्नों को बोर्ड की ओर से अवैध तरीके से डिलीट करने के भी आरोप लगाए गए। जिसके कारण याचिकाकर्ता को कम मार्क्स मिले और वह सलेक्शन होने से रह गया। कम परसेंट बनने के कारण याचिकाकर्ता के करियर और मेरिट पर विपरीत असर पड़ा है। इस पर हाईकोर्ट ने एक सप्ताह में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के चेयरमैन को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है।

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