प्रकृति और वन्य जीवों की सेवा को समर्पित परिवार, घायल पशु-पक्षियों की देखभाल और करते है उपचार।

श्रीगंगानगर ब्यूरो रिपोर्ट।
ये हैं गंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील के गांव थिराजावाला निवासी महावीर बिश्नोई। प्रकृति और वन्य जीव प्रेमी महावीर बिश्नोई क्षेत्र में बेजुबान पशु-पक्षियों की सेवा में समर्पित महत्वपूर्ण नाम हैं। घायल वन्यजीवों को बचाना हो, उनकी तीमारदारी हो या फिर पेड़-पौधों की सार-संभाल करते हुए पर्यावरण संरक्षण। इन सभी क्षेत्रों में महावीर बिश्नोई, परिवार और उनका खिराजवाला सेवा संस्थान थिराजवाला लंबे समय से सक्रिय है।
वन्यजीवों के प्रति सेवा का आलम ये है कि महावीर की पत्नी सुनीता और दोनों पुत्रियां कोमिला-भूमि भी निःस्वार्थ भाव से घायल बेजुबान पशु-पक्षियों को अपने घर पर लाकर उनका उपचार और देखभाल करती हैं।यही कोई दस साल पहले एक बेसहारा हिरण को बचाने से हुई प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की शुरुआत आज लंबा सफर तय कर चुकी है। इस दौरान बिश्नोई परिवार, धर्मेंद्र चौधरी, कपिल बिश्नोई, सुनील चौधरी सहित अन्य वन्य जीव प्रेमी खिराजवाला सेवा संस्थान थिराजवाला के बैनर तले 13 सौ से अधिक वन्यजीवों और पक्षियों की देखभाल-उपचार कर चुका है।
फिलहाल संस्थान में पांच नीलगाय, चार चिंकारा प्रजाति के हिरण, 10 कृष्ण मृग, 4 खरगोश, 4 कबूतर सहित 27 वन्यजीवों का उपचार और देखभाल की जा रही है। इनमें से दो हिरण जन्मजात दृष्टिहीन और एक विकलांग है। महावीर बिश्नोई के अनुसार प्रतिवर्ष तकरीबन 150 वन्य जीव-पक्षियों का इलाज करने के बाद वे वन क्षेत्र में छोड़ देते हैं। इनमें हिरण, नीलगाय, खरगोश, मोर, बगुले से लेकर विदेशी सारस सहित स्थानीय पक्षी शामिल हैं। पिछले वर्ष बिश्नोई परिवार द्वारा 9 कृष्ण मृग, 2 चिंकारा हिरण और 5 नीलगाय सहित 16 वन्यजीवों को देखभाल और उपचार के बाद वन विभाग की सुपुर्दगी में सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा गया। इन वन्यजीवों में से कुछ नवजात या घायल होते हैं, जिन्हें उपचार के लिए संस्थान में लाया जाता है। समुचित उपचार के बाद स्वस्थ या बड़े होने पर संस्था के सहयोग से इन वन्यजीवों को सुरक्षित और प्राकृतिक आवास में वन विभाग की मौजूदगी में छोड़ दिया जाता है। दशक भर पहले सेवा की जो शुरुआत बिश्नोई परिवार ने की थी, आज वह जुनून और एक सार्थक उद्देश्य में बदल गई है। जैसे ही बिश्नोई परिवार या उनके संस्थान को क्षेत्र में कहीं भी वन्य जीव के घायल होने की सूचना मिलती है, तो सभी वन्य जीव को बचाने के लिए मौके पर पहुंचते हैं। 
घायल जीव को घर-अस्पताल में समुचित उपचार दिलवाया जाता है। बिश्नोई परिवार द्वारा निजी रूप से संचालित किए जा रहे संस्थान में हिरण, नीलगाय, खरगोश, मोर सहित अन्य सभी प्रजातियों की देखभाल और उपचार की व्यवस्था है। गांव और आसपास के वन्य जीव प्रेमी भी संस्थान के संचालन में यथायोग्य आर्थिक सहयोग देते हैं। कई परिवार अपने जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम भी यहां मनाते हैं, ताकि आमजन को वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सके। वन्यजीवों की देखभाल और उपचार के साथ-साथ बिश्नोई परिवार द्वारा इन्हें शिकारियों से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। शिकार संबंधी सूचना मिलने पर बिश्नोई परिवार और संस्थान द्वारा पुलिस को सूचना दी जाती है। शिकार करने वाले या शिकार की मंशा रखने वाले कई आरोपियों को पुलिस से पकड़वा चुके महावीर बिश्नोई और उनकी धर्मपत्नी सुनीता बिश्नोई को उनकी वन्य जीवों के प्रति निःस्वार्थ भावना को देखते हुए प्रशासन द्वारा उपखंड स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की निरन्तर प्रेरणा कहां से मिलती है, के सवाल पर महावीर-सुनीता कहते हैं कि गुरु जंभेश्वर की शिक्षाओं और नियमों में इसी बात का जिक्र है कि प्रकृति और पशु-पक्षियों से प्रेम करो। उनकी देखभाल और रक्षा करो। हम तो बस गुरुमहाराज की शिक्षाओं और नियमों का पालन करने में जुटे हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ARwebTrack