कुपोषण से मासूमों की मौत का मामला-पूर्व विधायक ललित मीणा ने सीएस के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।

बारां-हंसपाल यादव।
सहरिया जनजाति बाहुल्य किशनगंज- शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र में राज्य सरकार, राज्य सरकार में प्रतिनिधित्व करने वाले स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन की अनदेखी, गलत नीतियों व उदासीनता के कारण कुपोषण से हो रही मासूमों की मौतों को रोकने हेतु गंभीर कदम उठाने की मांग को लेकर किशनगंज- शाहाबाद से पूर्व विधायक ललित मीणा ने मुख्य सचिव के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराज़गी जताई। मीणा ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व सांसद दुष्यंत सिंह को भी घटनाक्रम से अवगत कराया। पूर्व विधायक मीणा ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं व खोखले दावो की पोल खोलते हुए कहा कि हाल ही में 7 जुलाई को देवरी की 3 वर्षीय सहरिया बालिका बिंदिया की मौत का मामला सामने आया था, वहीं उसकी पांच वर्षीय बहिन काजल एवं डेढ़ माह का नवजात भाई भी कुपोषित है तथा मां पपीता सहरिया टीबी से ग्रसित है। वहीं पठारी निवासी सोहन का मासूम पुत्र सुमन जिंदगी मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। जबकि ऐसी ही सरकारी उदासीनता के चलते पठारी गांव पूर्व में अपने तीन मासूमों को खो चुका है। मीणा ने चिंता जताते हुए कहा कि नीति आयोग से आशान्वित में इस प्रकार गर्भवती महिलाओं व बच्चों का कुपोषित होना गंभीर विचारणीय है। मीणा ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के शासन में जिले में सहरिया समाज के लिए 10 एमटीसी संचालित थे। जिनमें प्रत्येक में 3 नर्सिंग कार्मिक कुपोषित बच्चो की देखभाल के लिए कार्यरत होते थे।वर्तमान कांग्रेस सरकार ने 8 एमटीसी को बंद कर दिया है। वहीं गत वसुंधरा राजे सरकार के समय एमटीसी में भर्ती कुपोषित के अभिभावकों को रू.200/- प्रतिदिन का आर्थिक संबल भोजन व प्रोत्साहन हेतु दिया जाता था जिसे गरीब विरोधी गहलोत सरकार ने बन्द कर दिया। जिससे गरीब मजदूर परिवार ईलाज करवाने के लिए काम नही छोड़ने को मजबूर होते हैं। जिले में संचालित बारां व शाहाबाद एमटीसी में पर्याप्त आहार पोषण पैकेट नही मिल रहे हैं। जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूर्व विधायक मीना ने कहा कि अडानी फाउंडेशन के सहयोग से सीएसआर फंड से लगभग 50 लाख की लागत से प्रशासन, चिकित्सा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से 'नया सवेरा' प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। जिसके तहत 24 मई से 15 जून तक बच्चों की स्क्रीनिंग की जानी थी और 28 जून से 6 सितंबर तक चिन्हित कुपोषित बच्चों का उपचार किया जाना था। उन्होंने जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा की जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मुख्य सचिव को दिए गए प्रजेंटेशन की गाइड लाइन को फ़ॉलो नहीं किया गया। जो यह दर्शाता है कि वर्तमान में प्रशासन व चिकित्सा विभाग द्वारा उक्त समस्त कार्य केवल दस्तावेजों और फाईलों में किए जा रहे हैं तथा किशनगंज- शाहाबाद में 6 से 59 माह तक के प्रत्येक बच्चे की स्क्रीनिंग होने के दावे के पश्चात भी बालिका की मौत होना इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यदि 'नया सवेरा' कार्यक्रम को यदि धरातल पर किया जाता तो मासूम को बचाया जा सकता था। वहीं अप्रैल में शुरू होने वाला नया सवेरा प्रोजेक्ट क्रियान्वयन चार माह की देरी से हो रहा है। पूर्व विधायक मीणा को क्षेत्र के गांवों में भ्रमण के दौरान गर्भवती व धात्री माताओं ने बताया कि उन्हें मार्च माह के पश्चात पोषण व राशन सामग्री नही मिली है जिससे कुपोषण को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं 104 व 108 एम्बुलेंस की अनियमितता पर रोष जताकर उन्होंने वांछित संख्या में एम्बुलेंस की सुचारू व्यवस्था की मांग की। मुख्य सचिव को अवगत कराते हुए मीणा ने कहा कि चिकित्सा विभाग व समुदाय की योजक कड़ी आशा सहयोगिनियों को पिछले चार माह से वेतन नही मिल रहा है। जबकि वे निम्न मानदेय पर टीकाकरण, एएमसी, पीएनसी, परिवार कल्याण व कुपोषण सहित अन्य सर्वे सम्पन्न करती हैं। मीणा ने सीएस से आशा सहयोगिनी वर्ग को उचित मानदेय व बकाया वेतन दिलवाने का आग्रह किया। पूर्व मीणा ने काली हांडी कहलाने का दंश झेल चुके बारां जिले में कुपोषण मामलों में लापरवाही न बरतने, बंद पड़े एमटीसी पुनः शुरू करवाने, मासूमों की मौत पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सुनिश्चित कर आवश्यक कार्यवाही करने, एम्बुलेंस सेवा प्रभारी व व्यवस्थित करने, कुपोषण के कारण चिन्हित व अस्पताल में भर्ती मरीजों के अभिभावकों को आर्थिक सहायता देने, राशन व पोषण आहार पैकेट बांटने में लापरवाही न करने तथा नया सवेरा प्रोजेक्ट का कार्य धरातल पर करवाने एवं आशा सहयोगिनी वर्ग को चार माह का लंबित वेतन देने की मांग की।

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