अंता-नागदा-बलदेवपुरा पेयजल प्लांट बाढ़ में हुआ तबाह, 42 गाँवो और कस्बों को कई महीनों तक नहीं मिलेगा साफ पानी।

अंता-हंसपाल यादव।
अंता सहित 42 गाँवो को जोडऩे वाली नागदा बलदेवपुरा पयेजल परियोजना प्लांट बाढ़ में पूरी तरह डूबने से तहस नहस हो गया। जिससे अब इस प्लांट पर आधारित 42 गाँव व कस्बे के सामने पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गयी है और कई महीनों तक 42 गाँवो व कस्बे को शुद्ध पेयजल नही मिल पाएगा। अंता नागदा बलदेवपुरा पेयजल परियोजना प्लांट कालीसिंध नदी के उफान में पूरी तरह से तहस नहस हो गया। जिसमे प्लांट की लगभग एक किलोमीटर की इंटेक वाल पूरी तरह से टूट कर बह गयी। साथ ही बिजली सप्लाई ग्रेड उखड़ चुकी है। साथ ही प्लांट का पैनल रूम, ऐलम रूम व क्लोरीन रूम भी बाढ़ में डूबने से तबाह हो चुके है ओर प्लांट की अधिकांश मशीनरी भी खराब हो गयी है। 
आपको बता दे, कि अंता नागदा बलदेवपुरा पेयजल परियोजना 2016-17 में चालू हुई थी। इस परियोजना की लागत लगभग 57 करोड थी। तभी से इस परियोजना से 42 गांव व अंता कस्बे को फिल्टर पानी मिल रहा है। तथा यही क्षेत्र की पेयजल की लाइफ लाइन बन चुकी है। परंतु वर्तमान समय में कालीसिंध नदी के उफान के चलते कालीसिंध नदी के मुहाने पर बने फिल्टर प्लांट व इंटेक वाल पूरी तरह से तहस-नहस हो गये है। साथ ही फिल्टर प्लांट की मशीनें चारदीवारी सहित पूरे सिस्टम को कालीसिंध नदी के उफान ने बर्बाद कर दिया है। वहीं फिल्टर प्लांट में कितने ऊपर तक बारिश का पानी आया यह भी वर्तमान समय में प्लांट की खिड़कियों में फंसे हुए बारिश के कचरे व कर्मचारियों द्वारा पानी के लेवल की मार्किंग से सबसे ज्यादा भयावह स्थिति कालीसिंध नदी के फिल्टर प्लांट से लगभग 1 किलोमीटर दूर बने हुए इंटेक वाल तथा उसकी बृज की देखी गई हैं। यहां देखने पर पता चलता है कि कालीसिंध नदी का कितना उग्र रूप बारिश में हुआ था। कंक्रीट की बड़ी-बड़ी दीवारे तहस-नहस हो चुकी है। दूसरी ओर लोहे की जो पुल थी उसके अब अवशेष ही दिखाई दे रहे हैं। साथ ही पंप का विद्युत ग्रिड भी पूरी तरह से तबाह हो चुका हैं। परियोजना के XEN मनीष भट्ट ने बताया की प्लांट को ठीक करने में लगभग एक महीने का समय तो लगेगा। इसके साथ ही पयेजल की वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश की जा रही हैं।

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