सब इंस्पेक्टर के साथ 66 हजार रूपये की ऑनलाइन ठगी, थानों के चक्कर लगाकर हुआ हताश।

चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
चित्तौड़गढ़ जिले में लगातार साइबर ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए समय-समय पर गाइडलाइन जारी की जाती है। लेकिन फिर  भी आमजन की लापरवाही स्वयं को आर्थिक नुकसान के दलदल में धकेल रही है। ऐसा ही एक मामला चित्तौड़गढ़ निवासी और अजमेर पुलिस लाइन में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत एक पुलिसकर्मी मिट्ठू सिंह के साथ 66 हजार की ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। जिसकी रिपोर्ट दर्ज ऑनलाइन 1930 पर दर्ज करवाने के बाद पीड़ित सब इंस्पेक्टर संबंधित सदर थाने और साइबर थाने के बीच धक्के खाता रहा। लेकिन करीब 17 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई है।दरअसल मामला अजमेर पुलिस लाइन में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत मिट्ठू सिंह का है। जिसके पास शनिवार देर शाम 9835896627 नंबर से बंद एसबीआई क्रेडिट कार्ड को पुनः चालू करवाने के लिए कॉल आता है। इसके बाद 9406749203 पर व्हाट्सएप पर एक लिंक के माध्यम से सत्यापन करवाने के लिए कॉल आया और लिंक को खोलते ही पहले 25387 और दूसरी बार आए लिंक को खोलने से 40620 रुपए पुलिसकर्मी के खाते से निकल गए। इसके बारे में जानकारी देते हुए पीड़ित पुलिसकर्मी मिट्ठू सिंह ने बताया कि खाते से 66 हजार की राशि निकलने की बाद जब वह इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए संबंधित सदर थाना पहुंचे तो वहां से उन्हें साइबर थाने भेज भेज दिया गया। पर थाने जाने के बाद वहां पर उन्हें किसी प्रकार की राहत नहीं मिली और ना ही उनकी रिपोर्ट दर्ज की गई। वहां से उन्हें ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा। जिसके लिए कलेक्ट्री चौराहे पर एक ई-मित्र संचालक को रखा गया है जो बंद पाई गई। उन्होंने बताया कि दोनों ही नंबर से रविवार को भी लगातार कॉल आने का सिलसिला जारी था। जिसके बारे में भी थाने में सूचना दी गई। लेकिन अभी तक उनकी ऑनलाइन रिपोर्ट पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई।जब एक पुलिसकर्मी की सुनवाई थानों में नहीं हो रही है तो आम आदमी को थानों में कितने चक्कर लगाने पड़ते होंगे इस बात का अंदाजा अब आप सभी लगा सकते हैं। अब एक सबसे बड़ा प्रश्न है की लगातार बढ़ते ऑनलाइन साइबर ठगी के मामले बढ़ने का जिम्मेदार लापरवाह आमजन है या पुलिस विभाग जोकि आमजन की गंभीर मामलों में भी सुनवाई करने में 24 घंटे लगाता है। जब तक ऑनलाइन ठगी के शिकार कई लोग हो जाते हैं और जब वह लोग संबंधित थानों और साइबर थाने में जाते हैं तो उनकी कार्यशैली को देखते हुए आम आदमी भी हताश होकर रह जाता है।

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