फोन टैपिंग से जुड़े मामले में 9 नवंबर को आएगा फैसला, लोकेश शर्मा को गिरफ्तारी से राहत बरकरार।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
प्रदेश में दो साल पहले कांग्रेस में बगावत से हुए राजनीतिक संकट के समय फोन टैपिंग से जुड़े मामले में अब 9 नवंबर को फैसला आएगा। तब तक सीएम के ओएसडी लोकेश शर्मा को गिरफ्तारी से राहत बरकरार रखी गई है। हाईकोर्ट में सोमवार को करीब दो घंटे तक बहस चली। लोकेश शर्मा की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। राज्य सरकार ने भी इस केस में पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता को भेजा था। लोकेश शर्मा की तरफ से बहस पूरी कर ली गई है। गजेंद्र सिंह शेखावत और दिल्ली पुलिस की तरफ से अब आगे बहस और होनी है। गत 14 जुलाई को सुनवाई आज के लिए टल गई थी।केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत के बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 21 मार्च 2021 को लोकेश शर्मा और अज्ञात पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। दिल्ली क्राइम ब्रांच में दर्ज इस केस को खारिज करने की मांग करते हुए लोकेश शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद लोकेश शर्मा को गिरफ्तारी से छूट मिली हुई है। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 13 मई को लोकेश शर्मा को बुलाकर पूछताछ की थी, इससे पहले मार्च में भी पूछताछ के लिए पेश हुए थे। जुलाई 2020 में सचिन पायलट खेमे की बगावत के समय विधायकों की खरीद-फरोख्त का दावा करते हुए गहलोत खेमे की तरफ से कुछ ऑडियो जारी किए गए थे। उन ऑडियो में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा से सरकार गिराने के संबंध में बातचीत का दावा किया गया था। एक दूसरा ऑडियो पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह का एक कारोबारी से बातचीत का भी था। ये ऑडियो सीएम के ओएसडी ने मीडिया को भेजे थे। भाजपा ने उस समय सरकार पर विधायकों के फोन टैप करवाने के आरोप लगाए थे। 34 दिन की बाड़ेबंदी के बाद पायलट खेमे से सुलह हो गई। यह मामला एकबार ठंडा पड़ गया था।

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