उल्लास के साथ मनाया गया शक्ति दिवस, स्तनपान पर हुई चर्चा।

श्रीगंगानगर-राकेश मितवा।
अनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान के तहत जिले में ‘शक्ति दिवस’ मनाया गया और इस दौरान स्तनपान जागरूकता सप्ताह के चलते भी स्तनपान भी चर्चा की गई। शक्ति दिवस जिले के प्रत्येक आंगनबाडी केंद्रों, राजकीय स्कूलों, उप स्वास्थ्य केंद्रों, सीएचसी, पीएचसी व राजकीय चिकित्सा संस्थानों पर हर मंगलवार को आयोजित किया जा रहा है।सीएमएचओ डॉ. गिरधारी लाल मेहरड़ा ने बताया कि शक्ति दिवस के दौरान अनीमिया की दर को कम करने के लिए बच्चों, किशोर- किशोरियों, प्रजनन उम्र की महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए विशेष गतिविधियां की गईं।
जिसमें स्क्रीनिंग, हिमोग्लोबिन की जांच, उपचार तथा अनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। अभियान के दौरान आशाओं की ओर से छह माह से 59 माह तक के बच्चों को, पांच से नौ वर्ष तक के स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को, 10 से 19 वर्ष की स्कूल नहीं जाने वाली समस्त किशोरी बालिकाओं को, 20 से 24 वर्ष की विवाहित महिलाओं को एवं गर्भवती महिलाओं को एवं धात्री माताओं को आंगनबाडी केंद्र पर मोबिलाइज किया गया। अनीमिया चिन्हित करने के लिए स्क्रीनिंग शारीरिक लक्षणों के आधार पर की जा रही है। आशा की ओर से छह माह से 59 माह तक के बच्चों को एक एमएल आईएफए सिरप पिलाई गई और पांच से नौ वर्ष के स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों का आईएफए की गुलाबी गोली खिलाई गई। वहीं 10 से 19 वर्ष तक की स्कूल नहीं जाने वाली समस्त किशोरी बालिकाओं को आंगनबाडी कार्यकर्ता की ओर से आईएफए की नीली गोली खिलाई गई। मंगलवार को स्तनपान की चर्चा करते हुए महिलाओं को बताया गया कि मां का दूध, बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए पोषण का सबसे अच्छा स्रोत है तथा बच्चे को छह महीने की अवस्था तक मां के दूध के अलावा अन्य कोई वैकल्पिक आहार नहीं दिया जाना चाहिए। प्रत्येक माँ को स्तनपान कराने की तकनीकों जैसे कि स्तनपान कैसे कराएँ? और स्तनपान कब कराना चाहिए? तथा स्तनपान से संबंधित अन्य पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। माँ का दूध शिशुओं को कुपोषण व अतिसार जैसी बीमारियों से बचाता है। नवजात शिशु के लिए कोलोस्ट्रम, पीला, चिपचिपा/गाढ़ा दूध संपूर्ण आहार है। जन्म के तुरंत बाद, एक घंटे के भीतर ही स्तनपान शुरू किया जाना चाहिए। शिशु को छह महीने की अवस्था के बाद और दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ पौष्टिक पूरक आहार भी दिया जाना चाहिए। स्तनपान कराने के दौरान, धूम्रपान अथवा शराब का सेवन न करें। यह बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है। स्तनपान कराने से पहले अथवा बाद में उचित स्वच्छता बनाई रखनी चाहिए। बच्चे को उसकी आवश्यकता के अनुसह्यह्यार अथवा चौबीस घंटों में आठ बार स्तनपान अवश्य करवाना चाहिए। बच्चे के लिए बोतल से दूध पीना हानिकारक हो सकता है। माँ का दूध संक्रमण से मुक्त होता हैं।

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