विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनने जा रहे रिवरफ्रंट ने सुरक्षा कवच की भूमिका निभाई-मंत्री धारीवाल।

कोटा-हंसपाल यादव।
कोटा में बन रहे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल और नदी किनारे क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षित करने के उद्देश्य से बनाए जा रहे चंबल रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट ने अतिवृष्टि एवं भारी मात्रा में कोटा बैराज से पानी की निकासी के दौरान ना सिर्फ निर्माण कार्यो की गुणवत्ता को साबित किया। बल्कि नदी किनारे बसी बस्तियों के लिए भी सुरक्षा कवच बनकर पानी को बस्तियों में घुसने से रोककर हजारों लोगों को पानी की अत्यधिक निकासी के दौरान होने वाली हमेशा की परेशानी से निजात दिलवाकर बड़ी राहत दी। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने बयान जारी कर कहा है कि चंबल रिवर फ्रंट के दूसरे फेज यानी ग्रीन फील्ड रिवर फ़्रंट का कार्यो पूर्ण हो जाने के बाद नदी किनारे के जिन क्षेत्रों में जल भराव हुआ था। वहां भी जलभराव की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वे कर रिपोर्ट पेश करने के जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही सर्वे कंप्लीट हो जाएगा जल्द ही बाढ़ प्रभावितों को सरकार की ओर से राहत प्रदान की जाएगी हमारा प्रयास है कि कोई भी बाढ़ प्रभावित व्यक्ति सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत से वंचित ना रहे। इसलिए सर्वे को लेकर लगातार जिला प्रशासन को निर्देश दिए जा रहे है। 
रिवर फ़्रंट इन इलाकों के लिए बना सुरक्षा कवच।
चंबल नदी पर बने बांधों से बड़ी मात्रा  पानी की निकासी के बाद पिछले सालों में जब कोटा बैराज से 4 लाख क्यूसेक के करीब पानी की निकासी की जाती थी तब नदी किनारे का ज्यादातर इलाके में बाढ़ के हालात बन जाते थे लेकिन इस साल 5 लाख क्यूसेक  से अधिक पानी की निकासी किए जाने के बाद भी निर्माणाधीन रिवरफट से सटा इलाका पूरी तरह सुरक्षित रहा रिवर फ्रंट की रिटेनिंग वॉल और नदी किनारे बन रहे रिवर फ्रंट ने जलप्रलय का बखूबी सामना किया। जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता एजाजुद्दीन अंसारी ने बताया कि रिवर फ्रंट ने शहर के अधिकांश हिस्से में भारी मात्रा में पानी की निकासी से होने वाले बाढ़ के हालातों को काबू करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, भविष्य में भी ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होने पर रिवर फ्रंट को सुरक्षा प्रदान करता रहेगा। उन्होंने बताया है कि रिवरफ्रंट की वजह से अधिकांश हिस्सा बाढ़ से बच गया साथ ही जिन क्षेत्रों में जलभराव के हालात बने वह भी और सालों के मुकाबले जलभराव कम हुआ।
यह क्षेत्र रहे सुरक्षित
खाई रोड, कर्बला, लाडपुरा, हारिजन बस्ती, फतेहगढ़ी, ब्रह्मपुरी, छोटी समाध बड़ी समाध वाला क्षेत्र, रामपुरा मुक्तिधाम का क्षेत्र, औघड़ की बगीची क्षेत्र, सैयद का बाग क्षेत्र, चंद्रघटा कब्रिस्तान वाला क्षेत्र, चश्मे की बावड़ी, नदी किनारे मकबरा इलाका,
पाटनपोल भट्टजी घाट का इलाका,
बोट के बालाजी सहित निर्माणधीन रिवर फ़्रंट क्षेत्र जलभराव से मुक्त रहा वही दूसरी और बन रहे रिवरफ्रंट से सकतपुरा, अंबेडकर बस्ती , बालापुरा, हनुमानगढ़ी, बटक बालाजी मंदिर क्षेत्र में भी रिवर फ्रंट ने सुरक्षा प्रदान की।

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