अगर ईआरसीपी प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिले तो बाढ़ के पानी का करें सदुपयोग-गहलोत

कोटा ब्यूरो रिपोर्ट।
सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाड़ौती के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि हाड़ौती के कई इलाकों में चंबल और अन्य सहायक नदियों में उफान आने के चलते बाढ़ जैसे हालात बनते हैं। ऐसे में ईआरसीपी प्रोजेक्ट की जरूरत है। इसके चलते लाखों लोग परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईआरसीपी योजना को स्वीकृति नहीं मिलने से भारी मात्रा में पानी समुद्र में मिल जाएगा। अगर योजना को स्वीकृति मिलती, तो कई जिलों को पानी और फसलों को जीवनदान मिलता। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए ईआरसीपी के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारी मात्रा में पानी व्यर्थ जाकर समुद्र में ही मिल जाएगा। अगर ईस्टर्न राजस्थान केनाल योजना को स्वीकृति मिलती है और इस पानी को रोका जाता है, तो कई जिलों को पानी और फसलों को भी जीवनदान मिलेगा। इसके अलावा 80 हजार हेक्टेयर में फैला नहरी तंत्र दोबारा से सुदृढ़ हो जाएगा। सीएम गहलोत ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस योजना को बिना कारण ही होल्ड पर डाला जा रहा है। जबकि हमने चंबल नदी में जा रहे हाड़ौती की नदियों के पानी का कैलकुलेशन करवाया है। धौलपुर में हमने अधिकारियों से इसका गेज करवाया है। उन्होंने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का बिना नाम लिए हुए कहा कि राजस्थान के नेता केंद्र सरकार में जल संसाधन मंत्री हैं, लेकिन एक योजना को वह राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाने में सफल नहीं हो पाए हैं। गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार के अधिकारी हमें पत्र लिखकर ईआरसीपी प्रोजेक्ट के काम को बंद करने के लिए कह रहे हैं। जबकि उन्होंने कोई पैसा नहीं दिया है और यह पानी का विषय भी राज्यों का आपसी होता है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना से समृद्धि आई है। बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, पाली सहित कई जिलों में पीने का पानी आ गया। बीकानेर के रेगिस्तानी इलाके को भी इससे फायदा हुआ है। सीएम गहलोत ने कहा कि यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बनाई थी। इसको मैं समझता हूं कि यह पॉलिटिकल मामला है। केंद्र सरकार चाहती है कि कांग्रेस की सरकार आ गई है, तो क्यों इस योजना को लागू किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने यह योजना बनाई थी वह मिस्टर वैदेरे हैं। इन्होंने ही राजस्थान में बतौर कंसलटेंट और एडवाइजर इस योजना को बनाया था। अब वही मिस्टर वैदेरे केंद्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय में कंसलटेंट हैं। वे भी ही इस योजना को बंद करने के लिए कह रहे हैं। केंद्र सरकार को इस पूरे मसले पर जवाब देना चाहिए। वे हमेशा ही 75 और 50 की बात कर गुमराह कर रहे हैं। यह योजना स्टेट गवर्नमेंट ने बनाई थी। सीएम गहलोत ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राजस्थान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की बैठक में समझौता के आधार पर ही बनी है। मध्यप्रदेश ने अपने बड़े-बड़े बांध इसमें बना लिए हैं। राजस्थान सरकार ने उनको एनओसी भी दी है। इन बांधों में राजस्थान से होकर ही पानी जाएगा। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार ईआरसीपी प्रोजेक्ट पर ऑब्जेक्शन कर रही है या फिर राजनीतिक रूप से उनसे केंद्र सरकार करवा रही है, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। सीएम गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान में हमारी सरकार बदलने के बाद 2013 से ही रिफाइनरी के काम को रोक दिया गया था। ऐसे में उसकी लागत 40,000 करोड़ से बढ़कर 70,000 करोड़ रुपए हो गई है। इसी तरह से यह ईआरसीपी प्रोजेक्ट भी 40,000 करोड़ रुपए का है। इसकी भी लागत आने वाले दिनों में बढ़ जाएगी। राज्यों के पास पैसा नहीं होता है, इसके बावजूद भी हमने इसके लिए 9000 करोड़ का बजट रखा है। सीएम गहलोत ने कहा कि लोगों को काफी नुकसान हुआ है। खेतों में भी पानी अभी भरा हुआ है। साथ ही उनके मकान भी टूट गए हैं। इन सब का सर्वे करवाया जाएगा और जितना संभव होगा, उतनी मदद की जाएगी। साथ ही कहा कि पानी भी लगातार कम हो रहा है। इससे भी लोगों को राहत मिल रही है। इस पूरे बाढ़ के मामले में हजारों लोगों का रेस्क्यू किया गया है। जिसमें एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस, सेना और नगर निगम की रेस्क्यू टीम में शामिल रही हैं। हेलीकॉप्टर से भी से 9 लोगों को बचाया है।

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