चितौड़गढ़ में एवीबीपी का रहा पलड़ा भारी, दो सीट पर सिमटी एनएसयूआई।

चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
चित्तौड़गढ़ जिले में हुए छात्र संघ चुनाव में जिले के सबसे बड़े पीजी कॉलेज और राजकीय कन्या महाविद्यालय सहित 7 महाविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और 2 महाविद्यालयों में एनएसयूआई को जीत मिली है। इस जीत के बाद जहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद खेमे में उत्साह का माहौल देखा गया वहीं जिले के सबसे बड़े महाविद्यालय को गंवाने के बाद एनएसयूआई समर्थित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में गम का माहौल देखा गया।
इन चुनाव परिणामों के आने के बाद चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की रणनीति सफल साबित हुई है। जिन्होंने इन चुनाव जीत के लिए काफी मेहनत की है। जीत के बाद निकल रहे विजय जुलूस में पुलिस प्रशासन और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए। जिस पर विधायक चंद्रभान सिंह के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
इनकी हुई जीत।
चित्तौड़गढ़ जिले में शुक्रवार को हुए 9 महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की मतगणना शनिवार को संपन्न हुई जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जिले के सबसे बड़े पीजी कॉलेज और राजकीय कन्या महाविद्यालय सहित गंगरार, बेगूं, रावतभाटा, सांवलियाजी,  कपासन महाविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का परचम लहराया है वही बड़ी सादड़ी, निंबाहेड़ा में एनएसयूआई को सफलता मिली है l वही निंबाहेड़ा में संयुक्त सचिव के पद पर एबीवीपी का प्रत्याशी विजयी हुआ है। वही चित्तौड़गढ़ जिले के सबसे बड़े महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पैनल ने एनएसयूआई पर बड़े अंतर से जीत हासिल की है। 
जिसमें अध्यक्ष पद पर भरत मेनारिया 978, उपाध्यक्ष पद पर परमानंद धाकड़ 621, महासचिव पद पर देवेंद्र सिंह 1376 और संयुक्त सचिव पद पर किरण खटीक 1476 मतों से विजयी घोषित हुए है। वही इस जीत के बाद विधायक चंद्रभान सिंह ने कहा कि यह जीत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की जीत है। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत होगी और चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र से एक बार फिर से 80 हजार से ऊपर के मतों के अंतर से भाजपा की जीत होगी। जिले के सबसे बड़े पीजी महाविद्यालय और राजकीय कन्या महाविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जीत के परचम लहराने के बाद अब एक बार फिर से चित्तौड़गढ़ की राजनीति में गर्माहट आना शुरू हुई है। जिसमें चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की मेहनत रंग लाती हुई दिखाई दे रही है। वहीं कांग्रेस के स्थानीय राजनेताओं की फूट एक बार फिर से इस महाविद्यालय चुनाव के परिणामों से दिखाई देने लगी है। जिसमें एनएसयूआई मे भी चुनाव प्रचार के दौरान अलग-अलग गुट दिखाई दिए। जिसका खामियाजा हुआ कि चित्तौड़गढ़ के प्रमुख दोनों महाविद्यालयों में उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। इन छात्रसंघ चुनावो को अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के सेमी फाइनल के रूप में देखा जा रहा था। जिसमें स्थानीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के रणनीति सफल होती दिखाई दे रही है। जिसके लिए अब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को चुनाव से पहले सोच विचार करने की आवश्यकता है।

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