कालीसिंध पुलिया की ढही सेफ्टीवाल, टला बड़ा हादसा।

बारां-हंसपाल यादव।
बारां जिले की शरुआती सीमा पलायथा कालीसिंध नदी पर बनी पुलिया के पास की  सेफ्टीवाल दीवार तेज बहाव के चलते ढह गयी। लेकिन गनीमत यह रही कि कोई बड़ा हादसा नही हुआ और प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से एक्शन लेते हुये मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। यह पुलिया राजस्थान की लंबी पुलियाओं में गिनी जाती है जो कि कई राज्यो को जोड़ती है। साथ ही बाराँ जिले को जोडऩे वाली कालीसिंध पुलिया पर से हजारों वाहन अन्य राज्यों में जाते है। बता दे, कि इस समय कालीसिंध नदी उफान पर है। जिसके चलते यह सेफ्टीवाल दीवार ढह गयी थी। इसके साथ ही मामले को लेकर दोनो ओर से पुलिया को वन वे कर दिया ओर पुलिया के एक ओर सिमलिया पुलिस व दूसरी ओर अंता पुलिस थाने का जाप्ता तैनात किया गया।
कालीसिंघ अभी भी बह रही खतरे के निशान पर, आधा दर्जन गाँव बने टापू।
अंता में दूसरे दिन भी कालीसिंध नदी कतरे के निशान पर बह रही हैं ओर 50 साल बाद कालीसिंध नदी में इतने पानी की आवक हुई है जिसके चलते नदी के तट वाले आधा दर्जन गाँव टापू बने हुए हैं। जिन पर प्रसाशन नजर बनाए हुए है वही रायपुरिया गाँव से 322 लोगो को बाहर निकाल कर सुरक्षित जगह पर इंतजाम किए गए। कालीसिंध में उफान के कारण अंता के पलायथा,लदवाड़ा, रायपुरिया, बालदड़ा, पाटुन्दा, हनोतीया,सहित कई गाँव कालीसिंध नदी के पानी के चपेट में आ चुके हैं। इसी के साथ नागदा बलदेवपुरा पेयजल परियोजना प्लांट भी पूरी तरह से डूब गया और क्षतिग्रस्त हो चुका है जिसके कारण कई दिनों तक लोगो को पीने का पानी भी उपलब्ध नही होगा। कालीसिंध नदी में लगातार बढ़ रहा पानी अभी भी खतरा बना हुआ है ओर कालीसिंध नदी से 100 फ़ीट ऊपर बना नागदा धाम भी पानी से तर हो गया जिसको लेकर प्रशासन लगातार मोनेटरिंग कर रहा है। शिवराज सिंह नागदा ने बताया कि ऐसा पानी लगभग सन 1972 मे आया था जिसको लगभग 50 वर्ष से भी ज्यादा समय हो चुका है ।

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