नेट मीटरिंग उपभोक्ताओं की फीड इन टेरिफ का निर्धारण, अब भुगतान 2 रुपए प्रति यूनिट की दर से।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
 राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) द्वारा जारी आरईआरसी ग्रिड इन्टर ऐक्टिव डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूवल एनर्जी जनरेटिंग सिस्टम रेगुलेशन - 2021 के अनुसार नेट मीटरिंग से जुडे घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा डिस्कॉम के ग्रिड में डाली गई अतिरिक्त उत्पादित विद्युत का भुगतान आयोग द्वारा अंगीकृत (Adopt) भारित औसत टेरिफ (Weighted Average Tariff) के अनुसार देय होगा। राजस्थान डिस्कॉम के अध्यक्ष भास्कर ए. सावंत ने बताया कि राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग द्वारा जारी रेगुलेशन-2021 के तहत घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं द्वारा निर्यात की गई बिजली की मात्रा बिलिंग अवधि के दौरान आयातित मात्रा से अधिक होने पर निर्यातित अतिरिक्त विद्युत की मात्रा को निगम द्वारा भारित औसत टेरिफ (Weighted Average Tariff) पर क्रय किया जाएगा। यह भारित औसत टेरिफ 5 मेगावाट और उससे वृहद सौर परियोजनाओं के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में प्रतिपर्धी बोली (Competitive Bidding) के माध्यम से ज्ञात करने के उपरान्त आयोग द्वारा अंगीकृत (Adopt)  किया जाता है। उन्होंने बताया कि राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग द्वारा 5 मार्च, 2019 को नेट मीटरिंग रेगुलेशन 2019 (प्रथम संशोधन) के तहत केवल घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं हेतु अतिरिक्त निर्यात की गई विद्युत के लिये भुगतान दर 3.14 रूपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई थी। परन्तु पिछले वित्तीय वर्ष में प्रतिपर्धी बोली के माध्यम से ज्ञात की गई भारित औसत टेरिफ 2.00 रूपये प्रति यूनिट आई है इसलिए 15 सितम्बर, 2021 से नेट मीटरिंग के तहत अतिरिक्त निर्यात की गई विद्युत का भुुगतान 2.00 रूपये प्रति यूनिट की दर से किया जाना है। वर्तमान में राजस्थान में लगभग 1.47 करोड विद्युत उपभोक्ता है इसमें नेट मीटरिंग के तहत डिस्कॉम के तंत्र से जुडे 28000 उपभोक्ता मे से केवल 20000 घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं ने नेट मीटरिंग की सुविधा ले रखी हैै। घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं द्वारा सम्पूर्ण उत्पादित विद्युत में से लगभग 82 प्रतिशत विद्युत का उपभोग तो स्वयं द्वारा कर लिया जाता है। इसलिए अधिकांश घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत उत्पादन का लाभ पूर्ववत मिलता रहेगा। नेट मीटरिंग से जुडे उपभोक्ताओं द्वारा डिस्कॉम से स्वयं के उपभोग हेतु ली गई बिजली का समायोजन उपभोक्ता द्वारा उत्पादित एवं ग्रिड में डाली गई विद्युत के विरूद्ध किया जाता है। केवल अतिरिक्त उत्पादित विद्युत डिस्कॉम ग्रिड मे डालने पर उसका भुगतान आयोग द्वारा निर्धारित दर पर किया जाता है।

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