20 हजार 324 गांवों में 48.80 लाख जल कनेक्शन के कार्यादेश हुए जारी-ACS PHED।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
अतिरिक्त मुख्य सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान में जल जीवन मिशन अपनी रफ्तार पकड़ चुका है और कई बड़ी परियोजनाओं के कार्यादेश शीघ्र होने वाले हैं। बड़ी परियोजनाएं शुरू होने के बाद जल कनेक्शन की संख्या लगातार बढेगी। उन्होंने कहा कि अभी तक राजस्थान में 27 प्रतिशत कनेक्शन हो चुके हैं और बुधवार को एक दिन में 3400 से अधिक कनेक्शन किए गए हैं। आने वाले दिनों में जेजेएम के तहत प्रतिदिन होने वाले ‘हर घर जल कनेक्शन’ की संख्या बढ़कर दुगुनी हो जाएगी। डॉ. अग्रवाल सचिवालय स्थित अपने कक्ष में जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जेजेएम के तहत अभी तक वृहद पेयजल परियोजनाओं के माध्यम से 22 हजार 771 गांवों में 55.33 लाख जल संबंधों तथा लघु परियोजनाओं के माध्यम से 16 हजार 482 गांवों में 39.75 लाख जल संबंधों की स्वीकृति प्राप्त कर ली गई हैं। साथ ही, 32 हजार 718 गांवों के 78.74 लाख (वृहद पेयजल परियोजनाओं के 42.82 लाख, लघु परियोजनाओं के 35.91 लाख) जल संबंधों की तकनीकी स्वीकृति जारी कर दी गई है। इनमें से वृहद पेयजल परियोजनाओं के माध्यम से 15 हजार 371 गांवों में 35.70 लाख जल कनेक्शन तथा अन्य परियोजनाओं के माध्यम से 13 हजार 165 गांवों में 30.94 लाख कनेक्शन के लिए निविदाएं आमंत्रित कर ली गई हैं। वृहद एवं छोटी परियोजनाओं में कुल 20 हजार 324 गांवों में 48.80 लाख जल कनेक्शन के लिए कार्यादेश जारी हो चुके हैं। शेष कार्यादेश प्रक्रियाधीन हैं। 33 जिलों में से 20 जिलों में जल संबंधों की शत-प्रतिशत स्वीकृतियां मिल चुकी हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि शुक्रवार को प्रस्तावित एसएलएसएससी की बैठक में विभाग द्वारा केन्द्र को भेजे गए कई और प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद मिशन की रफ्तार और बढ़ेगी। डॉ. अग्रवाल ने एमडी जल जीवन मिशन एवं अन्य अधिकारियों को दिसम्बर के अंत तक सभी कार्यादेश जारी करने की तय सीमा को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन दिए जाने वाले जल कनेक्शनों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
अप्रूव्ड कॉस्ट हो सकेगी रिवाइज।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने, केन्द्र और राज्य की हिस्सेदारी का अनुपात 90ः10 करने तथा जल जीवन मिशन के कार्यों को पूरा करने की अवधि बढ़ाकर 2026 तक करने जैसी बातें प्रमुखता से उठाई गई थी। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री एवं उनके स्तर पर भी समय-समय पर केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय एवं विभाग को पत्र लिखकर राज्य हित में विभिन्न मुद्दों से अवगत कराया गया है। राज्य की कुछ मांगों को केन्द्र सरकार द्वारा संज्ञान में लाकर उन्हें पूरा भी किया गया है और कुछ मुद्दे केन्द्र सरकार के स्तर पर लंबित हैं।बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी में वेरियेशन को केन्द्र सरकार द्वारा अनुमत किए जाने से अब अप्रूव्ड कोस्ट रिवाइज की जा सकेगी और संवेदक द्वारा किए जाने वाले कार्यों पर बढ़ी हुई जीएसटी का भार अब सिर्फ राज्य सरकार पर नहीं आएगा।उल्लेखनीय है कि हाल ही में केन्द्र सरकार ने वर्क कॉन्ट्रेक्ट पर लगने वाली जीएसटी 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी है। इसके अलावा विभिन्न परियोजनाओं में रॉ-मेटिरियल पर लगने वाली जीएसटी भी बढ़ी है। कार्य के दौरान जीएसटी रेट बढ़ती है, तो वो संवेदक को देय होती है। ऐसे में जिन संवेदकों के साथ एग्रीमेंट जीएसटी बढ़ने से पहले हुआ है, उन्हें जीएसटी वेरियेशन के कारण बढ़ी हुई लागत का भुगतान करने में आसानी होगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जल एवं स्वच्छता सहयोग संगठन (डब्लूएसएसओ) से जुड़ी सहयोगी संस्थाओं के कार्यों की भी मॉनिटरिंग करने एवं कार्य नहीं करने वाली संस्थाओं के खिलाफ एक्शन लेने के निर्देश दिए।

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