2024 में सरकार रीपीट करने का जादूगर का प्लान बी, देवदर्शन यात्रा का रोड़ मैप तैयार।



जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान में सवा साल के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बहुसंख्यक वोटों को साधने और बीजेपी के तुष्टिकरण के आरोपों को जवाब देने के लिए गहलोत सरकार जल्द ही देव दर्शन यात्रा की तैयारी में है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो विधानसभा सत्र के बाद राज्य की गहलोत सरकार देवों के द्वार जाएगी, जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सरकार के मंत्री और संगठन के लोग भी देवों के द्वार पहुंचेंगे। देव दर्शन यात्रा को लेकर सरकार में उच्च स्तर पर रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इस रोड मैप को फाइनल रूप देकर इसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंपा जाएगा। देव दर्शन यात्रा को लेकर सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक माह के भीतर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत धार्मिक मेलों और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को सुरक्षा को लेकर दो बार धर्मगुरूओं और मंदिर प्रबंधकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ओपन संवाद कर चुके हैं।

प्रदेश के एक दर्जन प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल।
सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की माने तो प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा प्रमुख धार्मिक स्थलों का दौरा करने और वहां पर आमजन से संवाद करने का रोड मैप तैयार हो रहा है। बताया जाता है कि जिन प्रमुख धार्मिक स्थलों का रोडमैप तैयार हो रहा है उनमें आदिवासी अंचल के बेणेश्वर धाम, त्रिपुरा सुंदरी, शेखावाटी अंचल के खाटू श्याम जी, सालासर धाम, जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर, अजमेर की ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह, पुष्कर धाम, राजसमंद के नाथद्वारा, चित्तौड़ के सांवलिया सेठ, करौली की कैला माता जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।

बीते 5 माह में कई धार्मिक स्थलों पर जा चुके हैं सीएम गहलोत।
दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बीते 5 माह में कई धार्मिक स्थलों पर जा चुके हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हाल ही में जहां पोकरण के रामदेवरा मंदिर दर्शन करने पहुंचे थे तो इससे पहले तिजारा के जैन मंदिर, चूरू के सालासर धाम, नाथद्वारा और अजमेर दरगाह उर्स में भी जियारत कर चुके हैं। वहीं मई माह में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ आदिवासियों के प्रमुख धाम बेणेश्वर धाम के भी दर्शन करके वहां पर जनसभा भी कर चुके हैं।

देवस्थान विभाग के जरिए भी हुए कई आयोजन।
प्रदेश के बहु संख्यक वोटों को रिझाने के लिए सरकार के देवस्थान विभाग की ओर से भी बीते 3 महीनों में कई धार्मिक आयोजन करवाए गए हैं जिनमें पहली बार जयपुर में भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया गया था। जिसमें सरकार के कई मंत्रियों ने कलश यात्रा निकाली थी। इसके अलावा सावन में मंदिरों में रुद्राभिषेक किया गया था तो सरकार के मंत्रियों की ओर से कावड़ यात्रा भी निकाली गई थी। गहलोत सरकार के अधिकांश मंत्री उसमें शामिल हुए थे। इससे साफ है कि गहलोत सरकार और संगठन की नजर प्रदेश के बहुसंख्यक वोटों पर हैं।

भाजपा के छवि धूमिल करने के प्रयास पर पलटवार।
दरअसल सरकार की ओर से देव दर्शन यात्रा के पीछे वजह यही है कि जिस तरह से बीजेपी और उसके प्रमुख संगठनों की ओर से कांग्रेस पार्टी और सरकार पर तुष्टिकरण और हिंदू विरोधी होने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस पार्टी सरकार के खिलाफ कैंपेन चलाया जाता है। ऐसे में गहलोत सरकार बीजेपी के आरोपों का जवाब देने और अपनी छवि दुरुस्त के लिए देव दर्शन यात्रा निकाल रही है। 
सवा साल के बाद होने हैं विधानसभा चुनाव।
प्रदेश में सवा साल के बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में गहलोत सरकार और कांग्रेस पार्टी देव दर्शन यात्रा के जरिए अपने परंपरागत वोट बैंक के साथ-साथ बहुसंख्यक वोटों पर भी सेंधमारी करके बीजेपी की खेमे में हलचल पैदा करना चाहती है।

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