अस्पृश्यता से मुक्ति और अत्याचारों की रोकथाम अभियान के लिए शिविर आयोजित।

हनुमानगढ़-विश्वास कुमार। 
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर द्वारा संचालित अस्पृश्यता से मुक्ति और अत्याचारों की रोकथाम अभियान के तहत सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संदीप कौर द्वारा नजदीक अबोहर रोड स्थित कच्ची बस्ती में निवासरत चितोडिया राजपूत समाज में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग हेतु जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में सचिव संदीप कौर द्वारा बताया गया कि समाज में व्याप्त छूआछूत को दूूर करना तथा अत्याचारों की रोकथाम करना उक्त अभियान का मुख्य उदेश्य है। समाज के कमजोर, हाशिये से दूर, दलितों एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों को अस्पृश्यता से मुक्ति दिलवाने उन पर हो रहे अत्याचारों को समाप्त करना है तथा अस्पृश्यता माने जाने वाले कार्याे के उदाहरणों के संबंध में बताया गया कि किसी व्यक्ति को किसी सामाजिक संस्था में जैसे अस्पताल, दवाओ के स्टोर, शिक्षण संस्था में प्रवेश न देना, किसी व्यक्ति को सार्वजनिक उपासना के किसी स्थल(मंदिर,मज्जिद आदि) में उपासना या प्रार्थना करने निवारित करना, किसी दुकान, रेस्टोरेंत, होटल या सार्वजनिक मनोरंजन के किसी स्थान पर जाने पर पाबंदी लगाना या किसी जलाशय, नल या जल के अन्य स्रोत, मार्ग, श्मशान या अन्य स्थान के संबंध में जहां सार्वजनिक रूप में सेवाएं प्रदान की जाती हैं। वहा जाने की पाबंदी लगाना। अनुसूचित जाति के किसी सदस्य का अस्पृश्यता के आधार पर अपमान करना,प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अस्पृश्यता का उपदेश देना, इतिहास, दर्शन या धर्म को आधार मानकर या किसी जाति प्रथा को मानकर अस्पृश्यता को सही बताना। (धर्म ग्रंथ मे जातिवाद लिखा है तो मे उसका पालन कर रहा हुं ऐसा नही चलेगा इसको भी अपराध माना जाएगा) तथा उन्हें उनके विधिक अधिकारों से जागरूक करते हुए बताया गया कि राष्ट्र में प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार दिये गए हैं और कानून के समक्ष भी सभी को समान माना गया है। ऐसे में किसी भी वर्ग के नागरिक के अधिकारों का हनन अनुचित है तथा इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं, नालसा व रालसा द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ दिलवाना उनका मुख्य उद्देश्य है यदि कहीं भी ऐसा भेदभाव पाया जाता है तो उसकी जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को देने की अपील की गई।

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