वन्यजीव संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता,राज्य सरकार के अथक प्रयासों से बढ़ रही है वन्यजीवों की संख्या-सीएम गहलोत।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में है। राज्य सरकार के वन्यजीव संरक्षण में अथक प्रयासों से ही प्रदेश में टाइगर की संख्या 100 से अधिक हो गई है। वहीं, पैंथर, ब्लैकबक, चीतल, हिरण, खरमोर  सहित अन्य वन्यजीवों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। गहलोत ने रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुंदरा एवं रामगढ़ विषधारी सहित प्रदेश के अभयारण्यों में आवश्यकता अनुसार कार्य योजना कार्य करने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। गहलोत मुख्यमंत्री निवास पर राज्य वन्यजीव मंडल की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वनों एवं वन्यजीवों के साथ-साथ वेटलैंड्स और ग्रासलैंड्स आदि के संरक्षण के लिए भी राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार वन्यजीव प्रेमियों, विशेषज्ञों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और वैटलैंड अथॉरिटी को मजबूत बनाने संबंधित प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सांभरलेक वैटलैंड संरक्षण के लिए अवैध ट्यूबवैल को शीघ्र हटाने और विशेषज्ञों के सहयोग से प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी वैटलैंड चिन्हिकरण एवं संरक्षण के कार्यों में गति लाने के लिए निर्देश दिए। 
ब्लैकबक की बढ़ी संख्या, बढ़ाएं क्षेत्र।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चूरू के तालछापर वन्यजीव अभयारण्य में ब्लैकबक की संख्या में वृद्धि हुई हैं। इनकी क्षमता से अधिक होने के कारण भूमि चिन्हित कर संरक्षित क्षेत्र को बढ़ाया जाए। इनके स्वच्छंद विचरण के लिए पुर्नवास कार्य को प्राथमिकता से शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। गहलोत ने कहा कि विश्व धरोहर में शामिल भरतपुर स्थित केवला देव राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवों के लिए पानी की आवश्यकता को शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि गोडावण, खरमोर और गिद्ध संरक्षण के लिए विशेषज्ञों के साथ कार्य किए जाए। 
कोटा एयरपोर्ट से संबंधित कार्यों में लाए तेजी।
गहलोत ने वन विभाग के अधिकारियों को कोटा एयरपोर्ट से संबंधित वन विभाग की अनुमति कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हवाई सेवाओं से पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। इससे कोटा और आसपास के क्षेत्र में वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि वन्यजीव मंडल की बैठक में प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेकर धरातल पर उतारें। 
2 अक्टूबर से वन्यजीव सप्ताह का आयोजन।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में 2 अक्टूबर से वन्यजीव सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान स्कूली बच्चों सहित आमजन में वन्यजीवों के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने से संबंधित रोचक गतिविधियों आयोजन किया जाएगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को पूरे सप्ताह के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए। वन्यजीव संरक्षण के लिए विभाग सजग और सतर्क।
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री हेमाराम चौधरी ने कहा कि वन विभाग सजग और सतर्क रहकर वन्यजीव संरक्षण और वनक्षेत्र विस्तार में लगातार कार्य कर रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा की नियमित मॉनिटरिंग का ही नतीजा है कि प्रदेश में वन्यजीवों की संख्या और इनके प्रति आमजन में लगाव बढ़ा है। वन्यजीव बोर्ड के सदस्य विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने वन विभाग में विभिन्न पदों को शीघ्र भरने, संरक्षण के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कराने तथा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में चीता लाने की संभावनाओं सहित अन्य कार्यों पर सुझाव दिए। विधायक खुशवीर जोजावर ने कुंभलगढ जोजावर इत्यादि क्षेत्र में लेपर्ड के संरक्षण हेतु सुझाव दिए। विधायक किशनाराम विश्नोई ने लोहावट में वन्यप्राणियों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था व शिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के बारे में सुझाव दिए। बैठक में राज्य वन्यजीव मंडल के स्तर पर विभिन्न स्वीकृतियों के प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। साथ ही, राज्य बजट में की गई विभागीय घोषणाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई। इस दौरान मानव और वन्यजीव संघर्ष, वन क्षेत्रों में जल प्रबंधन, दीवार निर्माण, अभयारण्य क्षेत्रों से मानव आबादी के पुनर्वास संबंधित चर्चा भी की गई। 
राज्य में वन्यजीव संरक्षण के कार्य।
बैठक में वन अधिकारियों ने बताया कि भेड़िया कन्जर्वेशन एवं ब्रीडिंग का कार्य जयपुर के नाहरगढ़ बायोलोजिकल पार्क में किया जा रहा है। धौलपुर के वन विहार वन्यजीव अभयारण्य व जालौर के सुंधा माता कन्जर्वेशन रिजर्व में भालू संरक्षण और चंबल घड़ियाल अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्र में घड़ियाल संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में हिरणों के सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर हाल ही में तैयार किया गया है। करौली में भी 3 माह में तैयार हो जाएगा। इसके बाद चीतल पुर्नवास किया जाएगा। बैठक में विश्व प्रकृति निधि के प्रतिनिधि दीपांकर घोष, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के प्रतिनिधि डॉ. कमर कुरैशी, भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण के प्रतिनिधि इंदु शर्मा, सनी सेबेस्टियन, सुनील मेहता, धीरेन्द्र गोधा, सिमरत कौर संधू सहित राज्य वन्यजीव मंडल के सदस्यों ने भी वन्यजीव संरक्षण से संबंधित विचार व्यक्त किए। बैठक में मुख्य सचिव उषा शर्मा, प्रमुख शासन सचिव वित्त अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन शिखर अग्रवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हॉफ दीप नारायण पाण्डेय, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिन्दम तोमर सहित कई विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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