नींद का एक अपना विज्ञान होता है - डॉ. रामावतार शर्मा

हर कोई जानता है कि नींद जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। पर नींद के विभिन्न पक्षों की वैज्ञानिक विवेचना ज्यादातर लोग नहीं कर पाते हैं। नींद एक ऐसी प्राकृतिक क्रिया है जिसके दौरान मानव शरीर के हर अंग का रख रखाव होता है, देखभाल की जाती है और आवश्यकतानुसार अंग और मन की टूट फूट को पुनः निर्मित किया जाता है इसीलिए एक गहरी नींद के बाद मन और तन प्रफुल्लित महसूस करते हैं। नींद पर बार बार इसलिए लिखा जाता है क्योंकि अनिंद्रा या अर्धनिंद्रा मनुष्य की सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक है।

     आज नींद की कमी के कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदयरोग आदि कितनी ही व्याधियां मानव जीवन को सताती रहती हैं, उसकी उपादेयता को निम्न करती रहती हैं। अनिंद्रा जीवनकाल को कम कर सकती है, अर्थहीन बना सकती है। देखा गया है कि उम्र बढ़ने के साथ साथ तकरीबन 60 प्रतिशत लोगों के सांस लेने के रास्ते में कोई न कोई बाधा होती है। किसी में नाक का कोई हिस्सा पतला होता है जिसके कारण खर्राटे आने से नींद बाधित होती है। मोटापे के कारण स्लीप अपनीया हो जाता है जिसमें बीच बीच में सांस रुक सी जाती है और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है। स्लीप अपनीया नींद को बहुत बाधित करता है, स्वांस लेने में डरावना सा संघर्ष होता है, मुंह सूख जाता है और रक्तचाप बढ़ जाता है। पीड़ित व्यक्ति अगले दिन थका हुआ रहता है। इन सब स्थितियों में किसी अनुभवी चिकित्सक की राय लेनी चाहिए।

     एक और सवाल उठता है कि क्या हमें दिन में नींद लेनी चाहिए? दिन में भोजन के बाद तो एक अल्पावधि की नींद ली जा सकती है पर लंबे समय तक नहीं सोना चाहिए। शाम के वक्त तो बिलकुल नहीं सोना चाहिए वरना रात्रि को जागरण करना पड़ सकता है। इसी तरह सोने से कोई तीन घंटे पहले ज्यादा श्रम वाली कसरतें नहीं करनी चाहिएं वरना नींद आने में दिक्कत आ सकती है।

     शराब नींद में सहायक नहीं होती है बल्कि उसमें बाधा ही खड़ी करती है। अत्यधिक मात्रा के सेवन से अर्धचेतना हो जाती है पर आरामदाई नींद नहीं आती है। हमें एक और बात याद रखनी चाहिए कि नींद का कर्ज शरीर पर चढ़ता है। यदि आप 6-7 घंटे प्रतिदिन से कम सोते हैं तो सप्ताह में किसी दिन आपको ज्यादा नींद लेकर निंद्रा कर्ज उतरना पड़ता है। जो लोग यह दावा करते हैं कि वे मात्र 4 घंटे रोज सोते हैं तो वे या तो असत्य बोलते हैं या फिर उनके निर्णय दूसरों के लिए घातक हो सकते हैं। मानव मस्तिष्क और शरीर को कम से कम 6 घंटे की नींद तो चाहिए ही होती है यदि उसे बेहतर तरीके से कार्य करना हो तो।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ARwebTrack