हमारे विकास का मॉडल अमीरों के लिए बना वरदान-अरुण ओझा।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
मुक्त मंच के तत्वावधान में डॉ. पुष्पलता गर्ग के सान्निध्य एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी एवं चिंतक अरुण कुमार ओझा की अध्यक्षता में ‘आजादी का अमृत महोत्सव और अमृत काल की चुनौतियां‘ विषय पर 61वीं मासिक संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी का संयोजन ‘शब्द संसार‘ के अध्यक्ष श्रीकृष्ण शर्मा ने किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विचारक अरुण ओझा ने कहा कि हमारा विकास मॉडल एकांगी है जो भौतिक विकास को प्राथमिकता देता है। यह अमीरों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। इससे मानवीय संवेदना के स्रोत सूखते जा रहे हैं। मुख्य अतिथि शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ नरेंद्र शर्मा कुसुम ने कहा कि हम रक्त की गहरी नदी पार करके आजादी के द्वार पर पहुंचे हैं। इसलिए आजादी के अमृत महोत्सव की मूल्यवान उपलब्धियां स्मरणीय एवं अभिनंदनीय हैं। विज्ञान से लेकर उद्योग और अनेक क्षेत्रों में अनगिनत उपलब्धियां हैं। हमारा मार्ग अभी भी कंटकाकीर्ण है। बेरोजगारी, महंगाई और असमानता की चुनौती मौजूद है। हमें लोकतांत्रिक मूल्यों का निरूपण करते हुए राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर जन-जन की पीड़ा का मुक्तिदाता बनना चाहिए। पूर्व आईएएस और डांग क्षेत्र विकास बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. एसएन सिंह ने कहा कि पंचवर्षीय योजनाओं के कारण सभी क्षेत्रों में सुनियोजित विकास हुआ है। अशिक्षा, गरीबी और असमानता के बावजूद आशातीत प्रगति हुई। सकारात्मक सोच और सद्भाव से ही देश आगे बढे़गा।समाजसेवी एवं पूर्व आईएएस आर.सी. जैन ने कहा कि विकास का जो मॉडल हमने चुना उससे आर्थिक असमानता की खाई और चैड़ी हुई एवं सामाजिक वैमनस्य बढ़ा है। इसे बदलना चाहिए ताकि गरीब, वंचित पिछड़े लोगों का विकास, समता और समानता का एहसास हो। शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। प्रतिष्ठित व्यंग्यकार कवि फारूक आफरीदी ने कहा कि 75 सालों में बहुआयामी विकास हुआ है किंतु बेरोजगारी, महंगाई और सांप्रदायिकता की चुनौतियां अभी भी विकराल रूप लिए हुए हैं, जिसके समाधान से ही देश उन्नत हो सकेगा। 
इंजीनियर दामोदर चिरानिया का कहना था कि सभी क्षेत्रों में निजीकरण और पीपीपी मॉडल से अराजकता बढ़ रही है। नियम विरुद्ध कार्यसंस्कृति का बढ़ना घातक है। विचारक डॉ. जनक राज स्वामी ने चिंता जताई की योग्यता की अनदेखी हो रही है। रामराज्य या गांधी के स्वराज की परिकल्पना को भुला दिया गया है। पूर्व बैंकर इंद्र भंसाली ने कहा कि मुफ्त की सौगात से सरकारों पर कर्जा बढ़ गया है और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है एवं कार्य संस्कृति का क्षरण हुआ है।कार्यक्रम संयोजक श्रीकृष्ण शर्मा ने कहा कि हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, औद्योगिक क्रांति, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी क्रांति के माध्यम से देश विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल हो गया है। भारत खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर हो गया है। 
संगोष्ठी में प्रतिष्ठित वित्तीय सलाहकार आर के शर्मा, वरिष्ठ लेखिका डॉ सुषमा शर्मा और विष्णु लाल शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।

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