पुष्कर में जूते-चप्पल फेंकने को विजय बैंसला ने पूरे समाज को लज्जित करने वाला बताया।

अजमेर ब्यूरो रिपोर्ट।
गुर्जर नेता विजय बैंसला ने कहा कि कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अस्थि विसर्जन से पहले गुर्जर सभा में असामाजिक तत्वों ने मंच पर जूते चप्पल फेंके, यह निंदनीय है। यह कार्यक्रम सामाजिक कार्यक्रम था। मंच पर गुर्जर आंदोलन में मारे गए 73 लोगों के परिजन बैठे थे। बल्कि उन मारे गए लोगों की फोटोज भी मंच पर लगी हुई थी। इस घटना ने पूरे समाज को लज्जित किया है। घटना को अंजाम देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रशासन और पुलिस को शिकायत भी दी जा रही है।अजमेर में श्रीनगर रोड स्थित एक भाजपाई नेता की होटल में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजय बैंसला ने प्रेस वार्ता की। प्रेस वार्ता में विजय बैंसला ने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन लोगों ने कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अस्थि कलश यात्रा में सहयोग किया। साथ ही विजय बैंसला ने उन लोगों पर भी तंज कसा जिन्होंने पुष्कर में गुर्जर सभा के दौरान चप्पल, जूते और पानी की बोतलें मंच की ओर फेंकी। उन्होंने कहा कि यह लोग किस से प्रेरित थे यह तो जांच में ही सामने आ सकता है। लेकिन जो घटना घटित हुई है उससे समाज लज्जित है। ऐसा किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में नहीं होना चाहिए। यह कार्यक्रम कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अस्थि विसर्जन का था। इसमें सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक लोगों को आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को जानने और मानने वाले हजारों की संख्या में लोग प्रदेशभर से ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से पुष्कर में उपस्थित हुए थे। विजय बैंसला ने कहा सचिन पायलट को 12 अगस्त को ही आमंत्रण दे दिया गया था। सामाजिक कार्य में कोई आए और कोई नहीं आए यह व्यक्ति की व्यस्तता पर निर्भर है। इसलिए जो लोग यह कह रहे हैं कि सचिन पायलट को कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया वह झूठ कह रहे हैं। विजय बैंसला ने कहा कि पिछले दिनों केकड़ी में मैने बयान दिया था उसको सोशल मीडिया पर तोड़ मरोड़ कर दिखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मैने कहा था कि सचिन पायलट मेरा छोटा भाई है, उसे चार साल पहले सीएम होना चाहिए था। समाज के लोगों ने सचिन पायलट को अपार सार्थन दिया। पायलट उपमुख्यमंत्री बने और उनके पास दो महत्त्वपूर्ण विभाग भी थे और अब वह एक विधायक है। मैंने यह भी कहा था कि गुर्जर समाज से 20 लोगों टिकट मिला था, लेकिन 8 लोग ही चुनाव जीते थे। वह 20 लोग भी चुनाव जीतते तो समाज का प्रतिनिधित्व बढ़ता।

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