सामाजिक जागरूकता द्वारा आत्महत्या रोकना संभव- सीएमएचओ।

करौली ब्यूरो रिपोर्ट।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन जिलेभर में हुआ। जिसके तहत एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में आत्महत्या मुक्त राजस्थान की शपथ व संगोष्ठी का आयोजन सहित प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। वहीं जिले भर में चिकित्सा संस्थानों पर विभागीय कार्मिकों एवं आशाओं द्वारा आत्महत्या रोकने की शपथ ली गई।एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में शपथ और संगोष्ठी आयोजन दौरान सीएमएचओ डॉ. दिनेश चंद मीणा द्वारा सामाजिक जागरूकता द्वारा आत्महत्या को रोके जाने की संभावना जताई एवं आत्महत्या के विचारों को विफल करने के लिए विभिन्न गतिविधियों द्वारा हताशा और निराशा को दूर करने, नशे की प्रवृत्ति पर रोक, आत्महत्या के कारकों की पहचान के बारे में बताते हुए बचाव के लिए आपसी चर्चा, सकारात्मक वातावरण निर्माण, तनाव प्रबंधन, मनोचिकित्सीय उपचार एवं मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक संसाधनों का उपयोग की बात रखी। उन्होंने नर्सिग एवं एएनएम प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन काल में कई बार विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। इसलिए हमें आत्मबल को मजबूत करना होगा, अपने घर-परिवार में सकारात्मक और तनाव मुक्त वातावरण बनाना होगा एवं आत्महत्या को बल देने वाले कारकों को दिनचर्या से निकालना होगा। तभी जाकर हम आत्महत्या मुक्त समाज का निर्माण करने में सफल हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को आत्महत्या के विचारों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। इसके लिए परिवार जनों से पर्याप्त बात करें, मन को ठेस पहुंचाने वाली बातों को नकारें और नशीले पदार्थों के सेवन से बचें और बचाएं। मनोचिकित्सक डॉ. प्रेम राज मीणा ने बताया कि विश्व मे तेजी से बढ़ती आत्महत्या की प्रवती पर रोक लगाने, रोकथाम के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है।  हर प्रतिकूल व नकारात्मक परिस्थितियों से उपजे मानसिक तनाव, निराशा, गुस्सा, अवसाद व अन्य बीमारियों से उपजी नकारात्मकता का सामना कर पाने में विफल रहने पर कुछ लोग खुद ही मौत को गले लगा लेते है जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की हाल ही जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में 1.64 लाख से अधिक लोगो ने आत्महत्या की। प्रमुख कारणों में पारिवारिक कलह है, जिसमें महिलाओं की तुलना में पुरुषों में आत्महत्या के मामले तीन गुना अधिक पाए गए। उन्होंने बताया कि व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों से उपजे तनाव, अवसाद, निराशा, नकारात्मकता के चलते दबाब न झेल पाने व खुद को अकेला मानने के कारण कई बार ऐसे आत्महत्या रूपी निराशाजनक कदम उठा लेता है।
आत्महत्या रोकने के उपाय।
मनोचिकित्सक डॉक्टर प्रेम राज मीणा ने बताया कि आत्महत्या रोकने के लिए अपनी बात परिजनों व दोस्तो से खुलकर रखे , खुद से वादा करे, नशीली दवाओं व शराब से बचे।तनाव प्रबंधन हेतु ध्यान व व्यायाम करें, अच्छा संगीत सुने, साथ ही सकारात्मक व प्रोटेक्टिव सोच रखें, अपनी क्षमता के हिसाब से कैरियर व रिश्तों का चुनाव करे। मानसिक समस्याओं को शारीरिक बीमारियों की तरह मानते हुए शुरुआती समय पर तनाव प्रबंधन, कॉउंसलिंग व मनोचिकित्सकीय उपचार करवाये।

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