होम गार्डस नहीं होगे परमानेंट, मंत्री ने विधानसभा सत्र में किया स्पष्ट।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
गृह रक्षा व नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा ने विधानसभा में कहा कि राजस्थान होमगार्डस एक स्वयं सेवी संगठन है, और इन्हें नियमित करने का वर्तमान में को विचार नहीं है। गुढ़ा ने प्रश्नकाल के दौरान इस संबंध में सदस्य द्वारा पूछे गये पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि होमगार्डस को पुलिस सेवा के समान नहीं माना जा सकता है। इनकी सेवाकाल में आयु सीमा को पुलिस के समान 60 वर्ष किये जाने का भी वर्तमान में को विचार नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में इनकी सेवाकाल की आयुसीमा को 55 वर्ष से बढ़ाकर 58 वर्ष किया गया था। इससे पहले गृह रक्षा व नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री ने विधायक संदीप शर्मा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि गृह रक्षा विभाग होमगार्ड जवानों को नियमित करने का विचार नहीं रखता है क्यों कि राजस्थान होमगार्डस अधिनियम- 1963 एवं राजस्थान होमगार्डस नियम 1962 के अनुसार यह एक स्वयं सेवी संगठन है। उन्होंने कहा स्वयं सेवकों को नियमित रूप से रोजगार दिये जाने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया कि गृह रक्षा विभाग होमगार्डस स्वयं सेवकों की सेवाकाल में आयु सीमा पुलिस की भांति 60 वर्ष करने का विचार नहीं रखता है और वर्तमान में इस प्रकार का कोई प्रस्ताव लम्बित नहीं है। अधिसूचना दिनांक 01 जून 2021 द्वारा स्वयं सेवकों की अधिकतम आयु सीमा 55 से बढाकर 58 वर्ष निर्धारित की गई है। गुढ़ा ने बताया कि गृह रक्षा विभाग राज्य मानवाधिकार आयोग की अनुशंषा अनुसार होमगार्ड जवानों के लिए सेवा नियम बनाने हेतु अधिनियम की धारा 162-163 में संशोधन का विचार नहीं रखता है। यह एक स्वयं सेवी संगठन होने के कारण स्थायी सेवा नहीं है। सेवा स्थायी नहीं होने के कारण सेवा नियम बनाने के लिये कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किये गये हैं। उन्होंने बताया कि गृह रक्षा विभाग द्वारा होमगार्ड जवानों की सेवामुक्ति पर उनके कल्याण हेतु विभागीय कल्याण कोष से एकमुश्त राशि दिये जाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि गृह रक्षा स्वयं सेवक की 58 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद गृह रक्षा की सदस्यता से पृथक होने पर अधिकतम राशि दो लाख रू. तक दिये जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त  स्वयं सेवक द्वारा स्वेच्छा से 20 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण कर गृह रक्षा की सदस्यता से पृथक होने पर अधिकतम राशि एक लाख रू. दिये जाने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि विभागीय कल्याण कोष से एकमुश्त राशि दिये जाने का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि गृह रक्षा स्वयं सेवक की नियोजन (ऑन ड्यूटी) अवधि के दौरान मृत्यु होने पर मनोनीत आश्रित को अधिकतम राशि तीन लाख रूपये दिये जाने का प्रावधान किया गया है। गुढ़ा ने बताया कि ऑनरोल स्वयं सेवक जिनका गृह रक्षा विभाग द्वारा नियोजन नहीं किया गया हो (ऑफ ड्यूटी) की मृत्यु होने पर उनके आश्रित को अधिकतम राशि दो लाख पचास हजार रु दिये जाने का प्रावधान है। वित्त (रूल्स) विभाग के आदेश 15 मार्च, 2017 द्वारा राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के नियम 75 व 76 के अन्तर्गत स्वयं सेवक की ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर एक्स-ग्रेसिया अधिकतम राशि बीस लाख रूपये तक दिये जाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि होमगार्डस स्वयं सेवकों को अनुकम्पात्मक नियुक्ति दिये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके स्थान पर होमगार्डस स्वयं सेवक की मृत्यु होने पर उनके आश्रित को गृह रक्षा स्वयं सेवक के रूप में नामांकित किये जाने का प्रावधान किया गया है।

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