नारी पीड़ा का जीवंत दस्तावेज है अमृता प्रीतम, अज्ज आखां वारिस शाह नूं में उमड़ी भावनाएं।

श्रीगंगानगर-राकेश मितवा।
अमृता प्रीतम एक साहित्यकार मात्र नहीं, नारी पीड़ा का जीवंत दस्तावेज है। एक ऐसा राग है, जिसे सदियों तक गाया जाता रहेगा। स्त्री को पुरुष के बराबर अधिकार दिलाने के लिए जितना अमृता ने लिखा, शायद ही किसी ने लिखा हो। यह बात राजकीय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय के सभागार में सृजन सेवा संस्थान की ओर से सदी की महान साहित्यकार अमृता प्रीतम की एक सौ तीनवीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम ‘अज्ज आखां वारिश शाह नूं’ में वक्ताओं ने कही। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए वरिष्ठ आलोचक एवं रंगकर्मी भूपेंद्रसिंह ने अमृता के लिखे को बहुत गहराई से प्रस्तुत करते हुए बताया कि अमृता के लिखे अनेक गीत कालांतर में लोकगीत बन गए। हम बचपन से जिन गीतों को सुनते आ रहे हैं, लेकिन गीतकार के नाम नहीं जानते थे। बाद में पता चला कि यह तो अमृता प्रीतम का लिखा हुआ है। उदाहरण के तौर पर ‘साड्डा चिडिय़ां दो चम्बा.। सिंह ने अमृता को प्रगतिशील विचारधारा की पैरोकार बताते हुए कहा कि समाज ने उन पर बहुत जुल्म किए, मुकदमे दर्ज करवाए लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और समाज के सामने एक मिसाल के तौर पर खुद को साबित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी के सचिव एनपी सिंह ने अमृता को एक हिम्मतवाली साहित्यकार बताया जिन्होंने भारतीय साहित्य को अप्रतिम रचनाएं दी हैं। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी जीपी सिंह अरनेजा ने अमृता प्रीतम की कविता सुनाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शायर राजेश चड्ढा ने कहा कि अमृता प्रीतम हो जाना कोई आसान काम नहीं था, वह भी उस दौर में जब नारी पर बहुत पाबंदियां थीं। उन्होंने अमृता की अनेक रचनाओं का जिक्र करते हुए उन्हें दर्द की रचनाकार बताया। साहित्यकार कृष्णकुमार आशु ने साहिर लुधियानवी, आर. इमरोज और अमृता प्रीतम के त्रिकोण का जिक्र करते हुए कुछ अविस्मरणीय प्रसंग सुनाए।कार्यक्रम में ममता आहुजा, मीनाक्षी आहुजा, ऋतुसिंह, नेहा अरोड़ा एवं तमन्ना ने अमृत प्रीतम रचित कविताओं का वाचन बहुत प्रभावी तरीके से किया और अमरिंद्रसिंह शिल्पी, विजय भाटिया एवं सिमरजीतसिंह ने अमृता के गीत सुनाए। सृृजन सेवा संस्थान के अध्यक्ष अरुण शहैरिया ताइर ने आभार जताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

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