सुप्रीम कोर्ट ने गहलोत सरकार की जांच रिपोर्ट को माना सही, मेयर सौम्या गुर्जर को कभी भी किया जा सकता है बर्खास्त।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
ग्रेटर नगर निगम जयपुर की मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट जो न्यायिक जांच रिपोर्ट पेश की थी उसे कोर्ट ने सही मानते हुए सरकार को कार्रवाई के लिए स्वतंत्र कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई 2 दिन बाद यानी 25 सितंबर बाद ही करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब संभावना है कि 26 सितंबर को कोर्ट के आदेशों की रिर्टन कॉपी मिलने के बाद सरकार सौम्या गुर्जर को किसी भी समय पद से बर्खास्त कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई में जस्टिस अजय ओक और जस्टिस संजय किशन कौल ने ये आदेश सुनाए।कोर्ट में राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के बाद निर्देश दिए है कि सरकार न्यायिक जांच की रिपोर्ट के बाद नियमानुसार कार्यवाही करें। कोर्ट ने सरकार को कहा कि वह 2 दिन इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं करें।मेयर सौम्या गुर्जर की तरफ से पैरवी अधिवक्ता रूचि कोहली ने की। मेयर सौम्या गुर्जर और अन्य तीन पार्षदों के खिलाफ जून 2021 में शुरू की गई न्यायिक जांच की रिपोर्ट पिछले महीने 10 अगस्त को सरकार को पेश की गई थी, जिसमें सौम्या सहित अन्य 3 पार्षदों को दोषी पाया गया था। 11 अगस्त 2022 को सौम्या और 3 अन्य पार्षदों के खिलाफ न्यायिक जांच की रिपोर्ट आई, जिसमें सभी को दोषी माना गया। सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मिलने के बाद सरकार अब न्यायिक जांच की रिपोर्ट के आधार पर मेयर सौम्या गुर्जर को पद से बर्खास्त करने के आदेश जारी कर सकती है। सरकार इससे पहले तीन अन्य पार्षदों को 22 अगस्त को ही पद से बर्खास्त कर चुकी है। वार्ड 72 से भाजपा के पार्षद पारस जैन, वार्ड 39 से अजय सिंह और वार्ड 103 से निर्दलीय शंकर शर्मा सदस्यता को खत्म कर दिया है। इन पार्षदों को भी सरकार ने इसी न्यायिक जांच के आधार पर पद से हटाया है।

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