पितृ पक्ष में कथा श्रवण से पितरों को मिलती है शांति-मारूतिनंदन शास्त्री।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
पावन देवभूमि बद्रीनाथ के साधु सुधा आश्रम में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ कलश शोभायात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। श्रीमद्भागवत महापुराण के पूजन के पश्चात वेदमंत्रों के उच्चारण के साथ इस कथा के प्रथम दिन का शुभारंभ किया गया। श्रीमद् भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ में परम श्रद्धेय मारूतिनंदन महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि वेदों का सार युगों-युगों से मानव जाति तक पहुंचता रहा है। ‘भागवत महापुराण’ यह उसी सनातन ज्ञान की पयस्विनी है जो वेदों से प्रवाहित होती चली आ रही है। इसीलिए भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। मारूतिनंदन महाराज ने कहा कि पितृ पक्ष में श्रीमद्भागवत कथा सुनने का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा की पितृ पक्ष में कथा का श्रवण करने से पितरों को शांति मिलती है वहीं यह उनके परिवार के लिए पुण्यदायी भी रहती है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा भाव से पितरों के पूजन तर्पण से मानव को सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। मनुष्य देवच, पितृ तथा ऋषि ऋणि होता है, भागवत सुनने से उन्हें इन ऋणों से मुक्ति मिल जाती है। मारूतिनंदन शास्त्री ने चिन्ता व्यक्त करते हुये कहा कि लोग अपनी संस्कृति व सभ्यता को भूलते जा रहे हैं। लोगों को पितरों के तर्पण-श्राद्ध का विधि विधान से पालन करना चाहिये ताकि उनके पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होगी।

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