चितौड़गढ़ में नो बैग्स डे की घोषणा पर लगा सवालिया निशान।

चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
राज्य सरकार के निर्देशानुसार सभी विद्यालयों में प्रत्येक शनिवार को नो बैग्स डे के अंतर्गत पढ़ाई के अतिरिक्त अन्य खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित कराने के साथ बच्चों के मानसिक विकास के लिए अन्य विविध कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसको लेकर चित्तौड़गढ़ मुख्यालय पर संचालित हो रहे सरकारी विद्यालयों के हालात कुछ और ही बयां करते हैं। राज-काज न्यूज टीम ने जब कई विद्यालयों का दौरा किया तो पाया गया कि कुछ संस्था प्रधान सरकार के इन आदेशों पर सवालिया निशान लगाते हुए बच्चों के पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करने वाला नियम बता रहे हैं। कई विद्यालयों में अध्यापक के जन्मदिन पर केक काटते हुए दिखाई दिए और कुछ विद्यालय के संस्था प्रधान कक्षाओं को संचालित करने में रुचि दिखा रहे थे। संस्था प्रधान अपने रुतबे के साथ एक शिक्षक पर भार डालकर अन्य शिक्षकों के साथ बैठे दिखाई दिए । दरअसल राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बच्चों में सर्वांगीण विकास के लिए सप्ताह में एक दिन बच्चों को पढ़ाई से दूर रखने के साथ हर शनिवार को सभी विद्यालयों में खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित करने के साथ अन्य गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए थे। जिस पर शनिवार को मुख्यालय पर संचालित हो रहे कई विद्यालयों का दौरा किया तो एकमात्र स्कूल महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय में मुख्यमंत्री के निर्देश अनुरूप चित्रकला सहित कई अन्य गतिविधियां संचालित होती हुई दिखाई दी। इसके अलावा अन्य विद्यालयों में ऐसा लगा कि संस्था प्रधानों के लिए मुख्यमंत्री के इस महत्वपूर्ण आदेश कहीं मायने नहीं रखते हैं और विद्यालयों में अपने मन से संचालित करते हुए दिखाई दिए। एक विद्यालय में अध्यापक का जन्मदिन भी मनाया गया जिसमें विद्यालय का सारा भार एक शिक्षक पर डाल दिया गया और अन्य टीचर जन्मदिन की पार्टी मे व्यस्त रहे। मुख्यालय के शहरी क्षेत्र में संचालित हो रहे एक बड़े विद्यालय में कक्षाओं को संचालित होता देख जब संस्था प्रधान से बात की तो उन्होंने कहा कि सप्ताह में एक दिन पढ़ाई नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है। इसीलिए बच्चों की मंशा को ध्यान में रखते हुए कक्षाओं का संचालन करना अनिवार्य है। सरकारी आदेश के बारे में उन्होंने सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि दिनभर खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित कराना संभव नहीं है। बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक है और बच्चों को तैयारी करवाने के उद्देश्य से शनिवार को भी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। संस्था प्रधानों की ओर से नो बेग्स डे पर अधिकांश विद्यालयों में बच्चों की कम उपस्थिति होने पर अपने अलग-अलग तर्क दिए गए। जिसमें कुछ संस्था प्रधानों के तर्क गले नहीं उतरते हैं कि आगामी दिनों में 4 दिन के अवकाश के कारण आज उपस्थिति कम है। कुछ विद्यालय के शारीरिक शिक्षक के साथ अन्य शिक्षक भी विद्यालय से नदारद मिले तो अब कौन मुख्यमंत्री के निर्देश की पालना करवाएं क्या एक बड़ा प्रश्न दिखाई देता है।

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