गहलोत राजस्थान अर दिल्ली, दोनु स दूर कोनी

प्रधान संपादक प्रवीण दत्ता की कलम से 
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तय कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाकात की और उनके सामने अध्यक्ष बनने की सूरत में राजस्थान की परिस्तिथियों का हवाला देते हुए दिसंबर तक सीएम पद पर बनाए रखने का आग्रह किया। अब वे अपने अंतिम प्रयास के लिए केरल में भारत जोड़ो यात्रा कर रहे राहुल गाँधी से मुलाकात करेंगे। 
नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने जो बयान दिए उसकी सबसे स्पष्ट प्रतिक्रिया कोच्चि से भारत जोड़ो यात्रा के संयोजक दिग्विजय सिंह ने दी। उन्होने साफ़ कहा कि अगर अशोक गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें सीएम का पद छोड़ना होगा। 
असल में गहलोत को राजस्थान का मुख्यमंत्री पद छोड़ने में इतना संकोच नहीं है जितना इस बात का कि राहुल गाँधी अपने किए वादे के अनुसार उनकी जगह सचिन पायलट को प्रदेश की कमान सौंपें। गहलोत किसी भी सूरत में पायलट की बग़ावत को भूलने को तैयार नहीं है और कमोबेश यही स्थिति राजस्थान के ज्यादातर विधायकों और मंत्रियों की भी है। इस बात को आलाकमान भी तव्वजो दे रहा है लेकिन निश्चित ही 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का भविष्य ज्यादा बड़ी चिंता है। गाँधी परिवार को गहलोत की निष्ठा पर पूरा भरोसा है लेकिन वो यह भी समझ रहा है कि तीन बार के मुख्यमंत्री रहे गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर भी राजस्थान से एकदम कट नहीं जाएंगे। ऐसे में इस बात के पूरे आसार हैं कि गहलोत की दिसंबर तक सीएम पद पर बने रहने की बात मान ली जाए।  यानि राजस्थान को नया सीएम जनवरी में ही मिल पायेगा। इसका खामियाजा पार्टी और पायलट दोनों को भुगतना पड़ सकता है क्योंकि जनवरी को हटा दें तो आचार संहिता लगने से पहले पायलट के पास खुद को साबित करने के लिए लगभग आठ महीने का ही समय होगा। 
दूसरी तरफ अगर गहलोत को सितंबर में ही सीएम पद छोड़ना पड़ा तो गहलोत-पायलट गुट की आपसी कलह राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा का स्वाद बदमज़ा कर सकती है। 
एक बात तय है इस पूरे मामले में आखिरी निर्णय सोनिया गाँधी का होगा और वे राहुल और प्रियंका को वीटो कर सकती हैं।  सोनिया ने पहले भी विकट स्थिति से पार्टी को उबारा है और अपने कार्यकाल के अंतिम समय में ऐसा ही कुछ फिर करेंगी और यही गहलोत के लिए संजीवनी साबित होगी। 
सूत्र बताते हैं कि गहलोत गुजरात चुनाव के बाद और प्रदेश के अगले बजट की दिशा तय करने के बाद दिसंबर में अपनी सरकार के 4 साल का जश्न मनाना चाहतें हैं। यूं अगले सीएम के पास सिवाय गहलोत की सेट की हुई गाइड लाइन पर चलने के अलावा ज्यादा कुछ बचेगा नहीं।
गौर करने की बात यह भी है कि आज गहलोत ने दिल्ली में मीडिया से कहा कि अब उनकी किसी पद की कोई इच्छा नहीं है और वे तो मैदान में उतरना चाहते हैं। उनका मन राहुल के साथ भारत जोड़ो यात्रा से जुड़ने का है। अगर सच में ऐसा है तो राहुल ने भारत जोड़ो यात्रा का मोर्चा शानदार तरीके से संभाला हुआ है। अब बारी है गहलोत के गुजरात के मैदान में उतर कर, दो सिद्धहस्त राजनीतिक मदारियों के सामने जादू दिखाने की। कल्पना कीजिये अगर गुजरात चुनाव में गहलोत का जादू चल गया तो फिर राजस्थान में उनकी मर्जी के खिलाफ बने सीएम की स्थिति क्या होगी? कुछ कुछ वसुंधरा-मोदी जैसी? कुछ-कुछ। खासकर भाजपा में चल रही गुटबाजी के चलते गहलोत-राजे गठजोड़ बहुत बड़ा खेल कर सकता है। बहुत कुछ छुपा है भविष्य के गर्भ में। गहलोत साहब को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं।     
     

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1 टिप्पणियाँ

  1. संपादक महोदय, लेख अत्यंत सटीक एवं प्रासंगिक है और आपकी विद्वता और अनुभव को देखते हुए लगता है कि आपने भविष्य को आज ही स्पष्ट कर दिया है।

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