डॉक्टर, मैं रोजाना विटामिन खाता हूं - डॉ. रामावतार शर्मा


कोविड महामारी के बाद में हर दूसरा चौथा रोगी कहने लगा है कि डॉक्टर, मैं अपनी इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए मल्टीविटामिन रोजाना लेता हूं। यहां सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि इम्यूनिटी बूस्ट नहीं हो सकती है। हां, कमजोर हो चुकी इम्यूनिटी को सामान्य किया जा सकता है। इम्यूनिटी बूस्टर या उसको बढ़ाने के दावे विशुद्ध व्यावसायिक लाभ द्वारा प्रेरित हैं क्योंकि किसी जीव की जीन को इस तरह से परवर्तित करना असंभव है और जीन की बनावट में परिवर्तन के बिना कुछ भी बूस्ट नहीं किया जा सकता है। अब एक और सवाल उठता है कि क्या रोजाना विटामिन की गोली खाना उचित या लाभप्रद हो सकता है ?

     यहां जिस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए वह है कि क्या आप अपनी जीवनशैली को सही रख रहे तो या नहीं। अपने आप से जरा सवाल कीजिए कि क्या आप संतुलित भोजन ले रहे हैं या महज स्वाद के लिए भोजन की प्राथमिकताएं निर्धारित कर रहे हैं ? यदि आप को कोई विशिष्ट बीमारी नहीं है, आप संतुलित भोजन कर रहें तो आपको ज्यादातर विटामिंस की कमी नहीं हो सकती है। धूप स्नान की कमी और शाकाहारी भोजन से क्रमशः विटामिन डी और बी 12 की कमी रहती है तो यदि आप इन श्रेणियों में आते हो इन दोनों विटामिन का उपयोग कर सकते हो। पर यह सब किसी चिकित्सक से परामर्श के बाद ही करना चाहिए वरना इन विटामिन के रक्त स्तर बहुत ज्यादा हो जाते हैं जो कि शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

     मल्टी विटामिन की गोली या कैप्सूल में कई बार कई मिनरल भी होते हैं जिसकी बहुत से उपभोक्ताओं को शायद आवश्यकता ही नहीं हो। ये मिनरल यदि शरीर में ज्यादा हो जाएं तो नुकसानदेय होते हैं। उदाहरण के तौर पर शरीर में कैल्शियम की अधिकता हृदय रोग का कारण बन सकती है। विटामिन टैबलेट्स की आवश्यकता तभी होती है जब कोई लंबी बीमारी हो, आमाशय या आंतों के रोग हों, वीगन जीवनशैली के लोग हों या कुछ लोगों को किन्ही विशेष परिस्थितियों में रहना पड़ रहा हो। इसके अलावा हर विटामिन की गोली समान नहीं होती है। फार्मास्यूटिकल और नूट्रास्यूटिकल में कीमत और गुणवत्ता का बड़ा अंतर होता है। अधिकतर मामलों में नूट्रास्यूटिकल गोलियां भोजन की श्रेणी में होने से महंगी और कम गुणवत्ता वाली होती हैं। इसी लिए आजकल देशी और विदेशी सभी कंपनियां नूट्रास्यूटिकल दवाएं बनाने में व्यस्त हैं।

     आखिर में एक स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या विटामिंस अत्यधिक उपयोगी होते हैं ? कितने ही अध्ययन इंगित कर रहे हैं कि विटामिन कैंसर या हृदय रोग को नहीं रोक सकते हैं। ये मस्तिष्क को तीव्र भी नहीं करते हैं और ना ही लंबी उम्र पाने में सहायक होते हैं। ज्यादा सेवन से कुछ विटामिन जल्द मृत्यु का कारण जरूर बन सकते हैं। विटामिन सिर्फ उन्ही स्थितियों में फायदेमंद होते हैं जहां इनकी कमी होती है। लोग जो आकर्षक डिब्बों में चमकते कैप्सूल और गोलियों पर भरोसा करते हैं उन्हें जरा सावधान रहने की जरूरत है और यह जानने की कि क्रियाशील जीवनशैली और संतुलित आहार ही स्वस्थ जीवन का आधार है। लंबी उम्र बोतलों में बंद नहीं हो सकती है। जीवन को खुला आसमान और स्नेहिल मानसिकता की जरूरत होती है।

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