युवक की आत्महत्या पर लगा प्रश्नचिन्हः परिजन बोले बेटे का हुआ मर्डर, पुलिस ने कारवाई के नाम पर साधी चुप्पी।

जालोर-गणपत सिंह मांडोली।
 जालोर के जसवंतपुरा तहसील के रामसीन निवासी फुलाराम के पुत्र मोहनलाल की ओर से 31 अगस्त की रात फंदे पर लटक कर आत्महत्या करने के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन पुलिस मर्ग दर्ज कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देकर इस मामले को बंद करने पर तुली हैं। मौके से मिले साक्ष्य और शव की स्थिति ने एक कहानी को जन्म दिया है। 
लेकिन पुलिस इस कहानी के क्लाईमैक्स तक पहुंचने में कोई रूचि नहीं दिखा रही है। परिजन चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे है कि मोहनलाल की हत्या हुई हैं, लेकिन पुलिस इन सवालों के जवाब खोजने की चिंता में नहीं है। दरअसल रामसीन कस्बे में 31 अगस्त की रात को फंदे पर लटकते हुए 18 वर्षीय युवक का शव मिलने के बाद परिजन एवं समाज के लोगों ने हत्या की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। लेकिन हादसे के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस व प्रशासन के कान खड़े नहीं हुए हैं। मृतक के पिता व समाज के लोगों ने थानाधिकारी से निष्पक्ष जांच करने की मांग तो की, लेकिन पुलिस उनकी एफआईआर लिखने तक को तैयार नहीं है। मृतक मोहनलाल के पिता फुलाराम ने थानाधिकारी को दी रिपोर्ट में बताया कि उसका पुत्र 31 अगस्त को रात में घर से गणपति महोत्सव देखने के लिए निकला था। रात 11 बजे के बाद भी घर नहीं आने पर फोन किया तो दस मिनट में आने का कहकर 12 बजे लौटा था। लौटने पर परिवार के लोगों ने खाना खाने की बात कही तो मना कर नीचे कमरे में सोने चला गया। जबकि, परिवार छत पर सो रहा था। एक सितंबर सवेरे परिजन छत से नीचे उतरे तो मुख्य दरवाजा बंद था व अंदर दरवाजे की कुंडी नहीं लगी हुई थी। मोहनलाल घुटनों के बल छत के पंखे से लटका हुआ था। उसके शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोट लगी हुई थी और खून शरीर से बह रहा था। मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि उसके पुत्र की किसी ने हत्या कर घटनाक्रम को आत्महत्या में बदलने का अंजाम दिया है। पुलिस ने सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर शव का परीक्षण करवाया। चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंप दी। यहां तक सब कुछ क्लीयर है, लेकिन मौके से मिले साक्ष्य इस मामले में हत्या के एंगल की तरफ इशारा कर रहे हैं। जिस पर पुलिस चुप है। पहला तथ्य तो यही है कि युवक का कद कमरे जितना है, ऐसे में अगर मान लिया जाए कि उसने आत्महत्या की है तो भी जब परिजनों ने सवेरे शव देखा तो वह कमरे में घुटनों के बल कैसे मिला? दूसरा तथ्य यह है कि अगर वास्तविकता में उसने आत्महत्या की है तो उसके शरीर पर चोटों के निशान और जगह-जगह खून कैसे आया? तीसरा तथ्य यह है कि एक बार घर आने के बाद वह दाेबारा कुछ देेर के लिए बाहर गया था, ऐसे में पुलिस उसके मोबाइल की कॉल डिटेल के सहारे यह जानने की चेष्टा क्यों नहीं करती कि किसका कॉल आने पर वह दोबारा बाहर गया था? मामले में ऐसे कई सवाल है जो चिल्ला-चिल्लाकर उसकी हत्या के एंगल की तरफ जांच का इशारा कर रहे हैं, लेकिन पुलिस इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। इस मामले में पुलिस अगर परिजनों की रिपोर्ट दर्ज कर तफसील से हत्या के एंगल को लेकर जांच करें तो न केवल मामले का खुलासा हो सकता है, बल्कि एक गरीब परिवार को न्याय भी मिल सकता है।

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