राजस्थान छोड़ने से पहले गहलोत की आखिरी कोशिश।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फिर से पार्टी की कमान संभालने से साफ इनकार कर दिया है। फिर भी आलाकमान के करीबी माने जाने वाले नेता उन्हें मनाने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई सीनियर नेताओं ने राहुल के राजी नहीं होने की स्थिति में सीएम अशोक गहलोत को यह जिम्मेदारी उठाने की गुजारिश की है। इसके जवाब में गहलोत ने कहा है कि सोनिया गांधी कहेंगी तो वे अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हैं। इन नेताओं ने गहलोत को यह भरोसा भी दिया है कि यदि वे हां करते हैं तो आलाकमान उन्हें अध्यक्ष के साथ कुछ महीनों के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भी बरकरार रखने के लिए तैयार है। यही नहीं, मुख्यमंत्री बदलने की स्थिति में उनकी राय को पूरी तरजीह दी जाएगी, लेकिन अंतिम निर्णय आलाकमान का ही होगा। बता दे, कि 23 अगस्त को गहलोत की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद से ही यह चर्चा जोरों पर है कि उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाने पर सहमति बन गई है। सूत्रों ने साफ किया है कि इस बैठक में दोनों के बीच हुई बातचीत में यह मुद्दा शामिल नहीं था। यानी इस बारे में सोनिया और गहलोत के बीच बातचीत होना अभी बाकी है। हालांकि गहलोत सहित गांधी परिवार के करीबी नेताओं की कोशिश अभी भी यही है कि राहुल अध्यक्ष बनने को तैयार हो जाएं।
अशोक गहलोत शुरुआत से ही गांधी परिवार के विश्वाशपात्र।
अशोक गहलोत को शुरुआत से ही गांधी परिवार का 'यस 'मैन' माना जाता है। अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा चलने के बाद उन्होंने इससे लगातार इनकार तो किया, लेकिन यह भी दोहराया कि वे पार्टी के आज्ञाकारी सिपाही हैं। पार्टी उन्हें जो भी काम देती है वह उसे अनुशासित सिपाही के रूप में पूरा करते हैं। हालांकि वे अभी भी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि राहुल ही पार्टी का नेतृत्व करें। वहीं, राहुल ने शुक्रवार को कहा कि मैंने अपना फैसला ले लिया है कि मुझे क्या करना है। इसमें कोई कन्फ्यूजन नहीं है।
पायलट की चुप्पी से भी मिल रहे संकेत।
कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर उठापटक के बीच सचिन पायलट की चुप्पी भी सियासी संकेत छोड़ रही है। पायलट ने गहलोत को अध्यक्ष बनाने की चर्चा पर टिप्पणी नहीं की। उनके जन्मदिन पर भीड़ जुटी। विधायक वेद प्रकाश सोलंकी, इंद्राज गुर्जर व एससी आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा ने उन्हें सीएम बनाने की मांग मुखरता से उठाई।
वरिष्ठ नेताओं का मिला भरोसा।
अगर आलाकमान अध्यक्ष बनाने के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कुछ महीने सीएम भी बनाए रखने को तैयार है। मुख्यमंत्री बदलने की स्थिति मे गहलोत को पूरी तरजीह दी जाएगी।

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