नाबालिग के केस में कोर्ट का बड़ा फैसलाः ऑर्डर में लिखा- ईमानदार अधिकारी को दें जांच।

कोटा-हंसपाल यादव।
नाबालिग को बहला फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में कोटा की पोस्को कोर्ट क्रम-4 ने आदेश की पालना नहीं करने पर नाराजगी जताई है। जज आरिफ मोहम्मद ने एसपी केसर सिंह शेखावत के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए डीजीपी को निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की जांच डीएसपी (डिप्टी सुप्रीटेंडेंट पुलिस) मुकुल शर्मा से लेकर कोटा जिले से बाहर किसी वरिष्ठ और ईमानदार पुलिस अधिकारी को देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कोर्ट ने मुकुल शर्मा को 3 माह तक किसी मामले में अनुसंधान नहीं करवाने व पुलिस अकादमी या अन्य किसी अकादमी से ट्रेनिंग दिलाए जाने के निर्देश दिए।कोर्ट के आदेश में लिखा कि न्यायालय के आदेश में कमियां निकालने का कोई अधिकार एसपी को नहीं है। यदि 18 जुलाई को दिया गया इस कोर्ट का आदेश कानून के हिसाब से नहीं है तो सक्षम न्यायालय द्वारा उक्त आदेश को रद्द कर दिया जाएगा। आदेश की पालना न कर आदेश में कमियां निकालना अवमानना की श्रेणी में आता है। साथ ही मिस कंडक्ट की श्रेणी में भी आता है।
3 अगस्त को पुलिस की रिपोर्ट से पता चला, नहीं बदली जांच।
फरियादी के वकील लोकेश सैनी ने बताया कि 18 जुलाई को कोर्ट ने एसपी को निर्देश दिया था कि मामले की जांच डीएसपी मुकुल शर्मा की बजाय किसी अन्य अधिकारी से करवाई जाए। 3 अगस्त को पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश रिपोर्ट से मालूम चला कि मामले की जांच अभी तक डीएसपी मुकुल शर्मा ही कर रहे हैं। एसपी द्वारा कोर्ट के आदेश की पालना नहीं करने पर कोर्ट ने 4 अगस्त को दस्तावेज सहित सूचना एसपी से मांगी थी। इस पर 16 अगस्त को पुलिस की ओर से भेजे गए पत्र में मामले में केस डायरी मुकुल शर्मा के पास रहने देने का कारण उपलब्ध नहीं करवाया। कोर्ट ने इसे गम्भीर माना। 23 अगस्त को ऑर्डर किया। 27 अगस्त को वकील को लोकेश सैनी को ऑर्डर की कॉपी मिलने पर पूरा मामला सामने आया।
10 दिन में सूचित करने के दिए निर्देश।
लोकेश सैनी ने बताया कि कोर्ट ने डीजीपी को पत्र भेजकर निर्देशो का पालन करवाकर 10 दिन में सूचित करने के निर्देश दिए। कोर्ट द्वारा 18 जुलाई के आदेश का पालन नहीं करने वाले सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
यह था मामला।
परिवादी ने 26 अक्टूबर 2021 को सिटी एसपी को रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया था कि उसकी बेटी को गोविंद बंगाली जबरदस्ती तीन चार लोगों के साथ गाडी में डालकर ले गया। उसने अनंतपुरा थाने में हाथ से लिखी शिकायत दी पर उस पर कोई सन्तुष्ट जवाब नहीं मिला था। इसके बाद एसपी के आदेश से मामला दर्ज हुआ था। परिवादी ने 3 फरवरी को ईमेल के जरिए कोर्ट को बताया कि मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लगातार टालमटोल की जा रही है। इसलिए जांच अधिकारी पुलिस उप अधीक्षक एससी-एसटी सेल कोटा से अब तक की प्रगति रिपोर्ट तलब की जाए। इस पर कोर्ट ने 5 फरवरी को प्रकरण की तथ्यात्मक रिपोर्ट 8 फरवरी की तारीख को पेश करने के लिए कहा था। 8 फरवरी को डीएसपी मुकुल शर्मा की ओर से तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश हुई। 8 फरवरी को कोर्ट ने पीडि़ता को तलाश कर केस डायरी मय तथ्यात्मक रिपोर्ट 22 फरवरी को पेश करने के आदेश दिए। 22 फरवरी को डीएसपी की ओर से तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की गई। इसमें यह बताया गया कि पीड़िता व आरोपी की तलाश जारी है। जिस पर न्यायालय ने निर्देश दिया कि हर 15 दिन में अनुसंधान अधिकारी पीड़िता व आरोपी की तलाश की जांच की स्थिति और प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। कोर्ट के आदेश के बाद भी जांच अधिकारी द्वारा 23 मार्च, 6 अप्रैल, 22 अप्रैल, 18 मई, 3 जून, 16 जून और 1 जुलाई को रिपोर्ट पेश नहीं की गई। न ही केस डायरी पेश की गई।

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