जादूगर गहलोत ने उप-राष्ट्रपति धनखड़ से टीएमसी के सारे MP गायब करने का राज पूछा।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
सीएम अशोक गहलोत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से स्पष्ट तौर पर पूछ लिया कि आपने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर ऐसा कौन सा जादू किया कि तमाम सभी विरोधियों के बावजूद उनके सांसद मतदान से अनुपस्थित रहे और आप चुनाव जीत गए। सीएम गहलोत ने इस राज को खोलने के लिए धनखड़ से विधानसभा में आयोजित अभिनंदन समारोह में स्पष्ट बताने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी जैसी 'टफ लेडी' पर आप का जादू कैसे चला ? सीएम गहलोत ने धनखड़ से कहा कि मेरा 50 साल से आपसे रिश्ता है। मैं जब एनएसयूआई में था, तब से कुछ परिवारों से मेरे संबंध हैं। इनमें से धनखड़ परिवार भी शामिल हैं। मैं एक बात आपसे समझना चाहता हूं।  
राज्यपाल के रूप में आपकी भूमिका की खूब चर्चा रही। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जब तक आप रहे, तब तक वहां की सीएम बनर्जी और आपकी चर्चा रही। तीन साल में कोई दिन नहीं गया, जब धनखड़ साहब की और ममता बनर्जी की चर्चा नहीं हुई हो। इसके बाद आपने कौन सा जादू किया कि वही ममता बनर्जी आपको चुनाव जितवाने के लिए अपने सांसदों को अनुपस्थित करवा दिया। आपने ममता बनर्जी जैसी 'टफ लेडी' पर क्या जादू किया। जादूगर तो मैं हूं। मुझसे बड़ा जादूगर कोई है क्या हिंदुस्तान में। पूरे देश को अचंभा हुआ कि ममता बनर्जी कह रही हैं कि हम तो अनुपस्थित  रहेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अरे भाई कल तक तो आप 'प्यार-मोहब्बत' की बातें करते थे। सारी हदें पार करके भी आपके राजनीतिक संबंध अच्छे रहे। आप आराम से चुनाव जीत गए। केवल यही राज बता दीजिए। सीएम गहलोत ने कहा कि जब आपका चुनाव हुआ तब मैंने ही सबसे पहले बधाई दी। मैं और  विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी उस वक्त साथ बैठे थे। मैंने उस वक्त जो ट्वीट किया था। वही भावना मेरी अब भी है। भैराेसिंह शेखावत के बाद धनखड़ दूसरे नेता हैं, जो इस पद पर आए हैं। आपने राज्यपाल के तौर पर भी राजस्थान वासियों के लिए दरवाजे हमेशा खुले रखे। आपने हमेशा राजस्थानवासियों का मान-सम्मान बढ़ाया है। हमारे लंबे संबंध हैं।उपराष्ट्रपति धनखड़ ने भी सीएम गहलोत का खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत जीजी ने पूछा है कि वह कौन सा जादू है, जिसकी वजह से ममता बनर्जी ने वो निर्णय लिया। मैं राजनीति से परे हूं। राजनीतिक निर्णय कैसे और किस आधार पर लेते हैं, इस पर सीएम गहलोत,  पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ही इस स्थिति को स्पष्ट कर सकते हैं । उपराष्ट्रपति धनखड़  ने कहा कि उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनने के बाद मैंने उनसे (ममता बनर्जी से) कहा कि अब मैं आपके राज्य का राज्यपाल नहीं हूं। आप दिल पर हाथ रखकर सोचिए। क्या कभी भी मैंने कोई भी काम कानून और संविधान के दायरे के खिलाफ किया है ? क्या कभी भी मैंने चाहे उन्होंने कुछ भी कहा हो, कुछ भी हालात रहे हों, एक भी शब्द उनकी मर्यादा पर कटाक्ष करते हुए कहा है ? जो कुछ मैंने किया, खुली किताब की तरह किया। लिखित में किया। फिर भी मैं इस सदन के माध्यम से पहली बार उनके प्रति उनके कदम के लिए आभार प्रकट करता हूं। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि मैं सफल अधिवक्ता रहा। मैंने  राजनीतिक जीवन में सफलता के ट्रेड सीक्रेट दो महापुरुषों से लिया। ताऊ देवीलाल और भैरोसिंह शेखावत शामिल है। उन दोनों ने मुझे कहा कि ये ट्रेड सीक्रेट रखना। किसी को बताना मत। मैंने सीएम गहलोतजी की बात कभी टाली नहीं है। लेकिन उन दो महापुरुषोें में से काेई है नहीं, इसलिए वह ट्रेड सीक्रेट मैं नहीं बताऊंगा। मुझे यहां सदन में दिल की बात कहनी पड़ेगी। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि मैंने राज्यपाल बनने के बाद वसुंधरा राजे से मदद मांगी कि मेरी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। मुझे कोई न कोई जादूगरी का टोना बताएं। मुझे आज भी याद है कि विधानसभा चुनाव के वक्त चूरू से राजेंद्र राठौड़ उम्मीदवार थे। उस वक्त मैंने ऐसा जादू किया कि आज तक राठौड़ चुनाव वहां से जीत रहे हैं। सीएम गहलोत साहब आप कुछ नहीं कर पाए। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि संसद और विधानसभा बहुत सशक्त माध्यम हैं। संविधान बनाते समय इन्हें ताकत दी गई। लेकिन आज के हालात चिंताजनक हैं। अमर्यादित आचरण हो रहा है। जनप्रतिनिधि संसद और विधानसभा में इस तरह का आचरण कैसे कर सकते हैं कि हास्य का विषय बन गया। ये आचरण लोकतंत्र की जड़ें हिला देंगे। कोई कसर बाकी नहीं रही है। विचित्र और भयावह सीन संसद विधानसभाओं में देखा जा रहा हैं। जिन मुद्दों पर संसद विधानसभाओं में चर्चा करनी है, वो सड़क पर होती है। सांसद-विधायक सचेत हो जाएं। उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दे नहीं उठाए तो वह काम फिर सड़क पर होगा।

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