पेयजल परियोजनाओं में गुणवत्ता से नहीं होगा कोई समझौता-ACS PHED

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
अतिरिक्त मुख्य सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि फील्ड अभियंता यह सुनिश्चित करें कि पेयजल परियोजनाओं में कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं हो। उन्होंने क्वालिटी कंट्रोल विंग को और अधिक सक्रिय होकर कार्य करने एवं सैम्पल फेल होने पर संबंधित फर्म एवं सप्लायर के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए। डॉ. अग्रवाल जल भवन में विभिन्न पेयजल परियोजनाओं एवं जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कई वृहद परियोजनाओं की कम प्रगति पर संबंधित फर्मों को नोटिस जारी करने एवं परियोजनाओं की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फील्ड अभियंता साइट पर जाकर परियोजना के कार्य की प्रगति की जांच करें तथा परियोजनाओं में हो रही देरी के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
सोर्स फाइंडिंग कमेटी शीघ्र भेजें सोर्स सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न पीएचईडी रीजन में गठित सोर्स फाइंडिंग कमेटी पानी की उपलब्धता के संबंध में अपनी रिपोर्ट तैयार कर भेजें ताकि भूजल स्त्रोंतो पर आधारित जिन परियोजनाओं के लिए सोर्स सस्टेनेबिलिटी उपलब्ध नहीं है उनके बारे में सक्षम स्तर पर निर्णय लिया जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएचईडी की समीक्षा बैठक के दौरान इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे कि जहां लम्बे समय तक के लिए सोर्स सस्टेनेबिलिटी नहीं है वहां भूजल आधारित परियोजनाएं तैयार करने से पहले सोर्स सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर मंगवाई जाए। उन्होंने कहा कि जो परियोजनाएं सेंक्शन हो गई हैं उनमें भी भूजल की आगे रहने वाली उपलब्धता के बारे में सोर्स फाइंडिंग कमेटी अपनी रिपोर्ट दे।
पाइप उपयोग संबंधी गाइडलाइन्स की पालना सुनिश्चित करें।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने क्वालिटी कंट्रोल टीमों द्वारा किए गए निरीक्षणों एवं पाइप सैम्पलिंग के बारे में जानकारी ली। उन्होंने सैम्पल फेल होने के बाद संबंधित फर्म एवं सप्लायर के विरूद्ध की गई कार्रवाई के बारे में संबंधित अभियंताओं से रिपोर्ट मांगी। साथ ही, ‘स्टेट पाइप पॉलिसी-2015’ में पाइप उपयोग संबंधी गाइड लाइन्स की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने एवं निरीक्षण बढ़ाने के लिए सभी 58 नियमित एवं परियोजना खंडों में सर्कल स्तर की टीमों का गठन किया गया है। इसमें 37 नियमित वृत्त स्तरीय एवं 21 परियोजना वृत्त स्तरीय टीमें शामिल हैं। प्रत्येक वृत्त स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण टीम द्वारा 4 प्रोजेक्ट कार्यों एवं 4 ओटीएमपी योजनाओं का निरीक्षण करने का लक्ष्य तय किया गया है। 
जल परिवहन का बकाया भुगतान 30 तक किया जाए।
डॉ. अग्रवाल ने आपदा मद के तहत जल परिवहन के बकाया भुगतान के समस्त बिल प्रमाणित कर 15 नवम्बर तक जिला कलेक्टर्स को प्रस्तुत करने एवं 30 नवम्बर तक समस्त बकाया भुगतान क्लियर करवाने के निर्देश सभी एसीई एवं एसई को दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आपदा प्रभावित 8 जिलों में आपदा मद में 5491 लाख रूपए के जल परिवहन कार्य हुए उनमें से 3266 लाख रूपए के बिल प्रमाणित कर जिला कलेक्टर्स को प्रस्तुत कर दिए गए हैं। अभी तक 2224.18 लाख रूपए के बिलों का भुगतान लंबित है। डॉ. अग्रवाल ने जिला कलेक्टर्स से समन्वय स्थापित कर लंबित बिलों का भुगतान 30 नवंबर तक कराने के निर्देश दिए।
जनता जल योजना के कर्मियों का भुगतान शुरू।
अधिकारियों ने बताया कि जनता जल योजना में कार्यरत जिन मानदेय कर्मियों की बैंक डिटेल एवं आधार कार्ड संबंधी जानकारी संबंधित खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा उपलब्ध करा दी गई हैं उनका बकाया मानदेय भुगतान कर दिया गया है। शेष कर्मियों की डिटेल बीडीओ से प्राप्त होने के बाद पे-मैनेजर पर अपलोड कर उन्हें भी भुगतान शीघ्र किया जाएगा। एसीएस ने निर्देश दिए कि बीडीओ से समन्वय स्थापित कर अल्प वेतन भोगी इन मानदेय कर्मियों को जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए।  
जेजेएम में सामुदायिक योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाएं।
बैठक में बताया गया कि जल जीवन मिशन में अभी तक 29.90 लाख जल कनेक्शन दिए जा चुके हैं।अधिकारियों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत सामुदायिक योगदान (कम्यूनिटी कॉन्ट्रीब्यूशन) कम एकत्र होने से मिशन की गति धीमी है। सामुदायिक योगदान के कुल लक्ष्य 1,120 करोड़ को विरूद्ध अभी तक करीब 100 करोड़ रूपए एकत्रित हुए हैं। डॉ. अग्रवाल ने सामुदायिक योगदान में पिछड़े पांच जिलों बांसवाड़ा, जैसलमेर, कोटा, सवाई माधोपुर एवं अलवर के प्रभारी अभियंताओं एवं वहां कार्यरत सहयोगी संस्थाओं को ग्रामीणों में सामुदायिक योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए।अतिरिक्त मुख्य सचिव ने लंबित जांच प्रकरणों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही, अंतर्विभागीय प्रकरणों, विधानसभा में उठाए गए प्रश्नों के जवाब, वीआईपी पत्रों, राजस्थान संपर्क पोर्टल की शिकायतों, गुणवत्ता नियंत्रण टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण, अधिकारियों के दौरे, हैण्डपंप-ट्यूबवैल स्थापना, लंबित विद्युत कनेक्शन आदि की समीक्षा की।

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