राजनीति का शिकार हुआ दलित समाज, कई ने हिंदू धर्म का त्याग कर अपनाया बौद्ध धर्म।

बारां-हंसपाल यादव।
बारां जिले के भूलोन गांव में एक पखवाड़े पूर्व स्वर्ण समाज के लोगो द्वारा दलित युवको के साथ की गई मारपीट से आहत होकर 2 दलित परिवार सहित कई लोगों ने हिंदू धर्म का त्याग करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया और अपने घरो से देवी-देवताओ की प्रतिमा व चित्र नदी में विसर्जित कर दिए। यहां दलितो का राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश भी जमकर फूटा।  जिला बैरवा महासभा युवा मोर्चा के अध्यक्ष बालमुकंद बैरवा ने बताया कि भूलोन गांव में 5 अक्टूबर को राजेंद्र व रामहेत ऐरवाल द्वारा मां दुर्गा की आरती की गई थी। इससे आक्रोशित सरपंच प्रतिनिधि राहुल शर्मा व लालचंद लोधा ने दोनो दलित युवको के साथ मारपीट की थी। समाज द्वारा राष्ट्रपति से लेकर जिला प्रशासन तक न्याय की गुहार लगाई। परंतु पुलिस द्वारा सरपंच प्रतिनिधि के विरूद्ध कोई कार्यवाही नही की। प्रशासन से प्रताड़ित परिजनो व ग्रामीणो ने शुक्रवार को गांव से गली-मोहल्लों से होती हुई आक्रोश रैली निकाली गई। वही, बैथली नदी पर पहुंचकर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को निकाल नदी में विसर्जन कर डॉ. भीमराव अंबेडकर की 22 प्रतिमाए लेकर हिंदू धर्म छोड़ बौद्ध धर्म अपनाने की शपथ ली। 
बैरवा ने बताया कि दलित परिवार को लगातार जाने से मारने व गांव से बाहर निकालने की धमकियां दी जा रही हैं। अगर आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार नही किया गया तो उपखंड कार्यालय पर विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। यहां उन्होने राज्य में कानून व्यवस्था ठप होने व दलितो पर अत्याचार के मामले बढ़ने के आरोप लगाएं। इस अवसर पर रमेश मेराठा, बद्रीलाल बैरवा (छीपाबड़ौद), छीतरलाल बैरवा, पवन, रामहेत बैरवा, महेंद्र मीणा (तुर्कीपाड़ा) आदि मौजूद रहे। इस मामलें मे डीएसपी पूजा नागर ने बताया कि फरियादी द्वारा थाने में स्वयं द्वारा दर्ज कराई एफआईआर में सरपंच प्रतिनिधि का नाम नही लिखा हैं। इसे राजनीति तूल दिया जा रहा है। मामले की जांच की जारी हैं।

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