सीएम गहलोत ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्यों की ली क्लास, दिये सख्त निर्देश।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता एवं संवेदनशीलता के साथ प्रदेशवासियों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप गांवों-कस्बों तक उत्कृष्ट चिकित्सकीय सुविधाएं पहुंच रही हैं। इसी का परिणाम है कि आज राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में मॉडल स्टेट बनकर उभरा है। गहलोत मुख्यमंत्री निवास पर चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना तथा मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रारम्भ की हैं। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सभी योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए ताकि जानकारी के अभाव में कोई इनके लाभ से वंचित न रहे। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग के साथ आमजन का फीडबैक लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज स्वास्थ्य सेवाओं में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है। आज प्रदेश में एमआरआई, सीटी स्केन जैसी महंगी जांचों के साथ-साथ हार्ट, लीवर, बोनमैरो ट्रांसप्लांट जैसा महंगा इलाज निःशुल्क करवाया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने निजी अस्पतालों का आह्वान करते हुए कहा कि अस्पतालों में आने वाले मरीजों का इलाज सेवाभाव एवं संवेदनशीलता के साथ मानवीय आधार पर करें। गहलोत ने निरोगी राजस्थान की संकल्पना को साकार करने के लिए राज्य सरकार का सहयोग करने के लिए भी आग्रह किया। गहलोत ने पोस्ट कोविड समस्याओं को लेकर जागरूकता अभियान चलाये जाने के भी निर्देश दिए।
चिकित्सा शिक्षा में राजस्थान अग्रणी।
बैठक में बताया गया कि प्रदेशभर में चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। विभिन्न जिलों में नर्सिंग कॉलेज बनाने का कार्य भी प्रगति पर है, जिनके निर्माण उपरांत प्रदेश के सभी जिलों में राजकीय नर्सिंग कॉलेज स्थापित हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्याें में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने तथा सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरा करने के साथ-साथ शिक्षकों की उपलब्धता व गुणवत्ता भी सुनिश्चिित की जाए। दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ाने के लिए स्मार्ट क्लासेज एवं टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का सहारा लिया जाए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में स्नातक की 1950, स्नातकोत्तर की 1072 सीटें थीं, जो बढ़कर वर्ष 2022 में क्रमशः 3300 व 1690 हो गई हैं। गहलोत ने नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों में उपकरणों की सुचारू तथा समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं को केंद्र करे लागू।
गहलोत ने कहा कि राजस्थान जनकल्याणकारी योजनाओं में मॉडल स्टेट बन रहा है। यहां मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना, मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना, उड़ान योजना सहित अनेक योजनाओं से प्रत्येक व्यक्ति लाभान्वित हो रहा है। इससे सभी वर्गों को सामाजिक और आर्थिक संबल मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री से राज्य की ऐसी योजनाओं को पूरे देश में लागू करने का आग्रह किया। 
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्यों से किया संवाद।
बैठक के दौरान गहलोत ने प्रदेशभर के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राचार्यों से संवाद किया व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं पर फीडबैक लिया। चिकित्सकों ने योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा अस्पतालों में आधुनिक उपकरण व आवश्यक ढांचागत सुविधाएं मुहैया करायी जा रही हैं। कोरोनाकाल के दौरान राज्य सरकार के प्रभावी प्रबंधन के फलस्वरूप सभी जिलों में चिकित्सकीय सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ, जो आज मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। चिकित्सकों ने योजनाओं  के विस्तार व क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सुझाव भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के दौरान चिकित्सकों द्वारा दी गई मानवीय सेवा के लिए आभार व्यक्त किया।
अस्पतालों में लागू हो ‘कोड ऑफ कन्डक्ट’।
गहलोत ने राज्य के सरकारी अस्पतालों के प्रभावी प्रबंधन, साफ-सफाई व रखरखाव के लिए ‘कोड ऑफ कन्डक्ट’ लागू करने के निर्देश दिए हैं। इससे अस्पताल परिसरों में गंदगी फैलाने वालों पर रोक लगाकर कार्रवाई की जा सकेगी तथा अस्पतालों में अनावश्यक आवाजाही पर भी रोक लगेगी। गहलोत ने दवाईयों एवं जांचों के लिए लगने वाली लंबी कतारों से मरीजों को निजात दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इससे वहां भर्ती मरीजों को राहत मिलेगी व जल्द स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को प्रदेशभर के प्रमुख अस्पतालों का जल्द निरीक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर रख-रखाव के कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। अस्पतालों में शौचालयों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के भी निर्देश दिए।  
ग्रीन कॉरिडोर के लिए हो सरल प्रक्रिया।
गहलोत ने आपातकाल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने व अंग प्रत्यारोपण हेतु आवश्यक ग्रीन कॉरिडोर के लिए अपनायी जा रही प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि मरीज के इलाज में कोई बाधा न आए। गहलोत ने प्रदेश में ऑर्गन रेट्रीवल की प्रक्रिया को भी सदृढ़ करने के निर्देश दिए।
मेडिकल एजुकेशन पोर्टल का लोकार्पण।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों की सम्पूर्ण सूचनाएं एक साथ एक ही पोर्टल पर लाने के उद्देश्य से निर्मित चिकित्सा शिक्षा पोर्टल का लोकार्पण किया। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग द्वारा पोर्टल के साथ ही राजस्थान के 24 चिकित्सा महाविद्यालयों की वेबसाइट का निर्माण भी किया गया है।इस पोर्टल एवं वेबसाइट पर चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र की सभी योजनाएं, परियोजनाएं, बजट घोषणाएं, मुख्यमंत्री की घोषणाएं एवं निर्देश, कैबिनेट निर्णय, राजकीय दस्तावेज, प्रेस विज्ञप्तियां एवं जन जागरूकता संदेशों के साथ ही अनेक प्रकार की आमजन से संबंधित सूचनाओं को प्रदर्शित किया गया है।चिकित्सा एवं स्वाथ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री के ऐतिहासिक निर्णय लेने से प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उछाल आया है। मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के अंतर्गत सभी जिलों में आवश्यक दवाईयों की उपलब्ध्ता सुनिश्चित की जा रही है। इस कारण राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में मॉडल स्टेट बन गया है।प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा वैभव गालरिया ने बताया कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में अप्रैल से सितम्बर, 2022 के दौरान मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना के अन्तर्गत 1.18 करोड़ आउटडोर रोगी एवं 8.47 लाख इन्डोर रोगियों को लाभ प्रदान किया गया। 2.74 करोड़ रोगियों की निःशुल्क जांच की गयी। इन सेवाओं पर 209.55 करोड़ रूपये की राशि व्यय हुई। मुख्य सचिव उषा शर्मा, प्रमुख शासन सचिव वित्त अखिल अरोरा, शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पृथ्वी राज, प्रबन्ध निदेशक आर.एम.एस.सी.एल. अनुपमा जोरवाल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक सुधीर कुमार शर्मा, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त डॉ. घनश्याम, आरयूएचएस के कुलपति डॉ. सुधीर भंडारी, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव बगरट्टा सहित समस्त मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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