आपसी सिर फुटव्वल से बचते हुए गहलोत टाल सकतें हैं नए जिलों का गठन।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने नए जिले बनाने का काम चुनौतीपूर्ण है। राजनीतिक अस्थिरता और विधायकों को अपने पक्ष में बनाए रखने के लिए वे प्रदेश में नए जिले बनने के मामले को टालने का मन बना रहे हैं । अभी तक तो यह जोर शोर से तैयारी चल रही थी कि प्रदेश में 6 नए जिले बना दिए जाए। लेकिन परिस्थिति बदलने के बाद अब नए जिले बनाने का मामला नया राजनीतिक विवाद पैदा कर सकता है। यही कारण है कि सीएम गहलोत इस मसले पर कोई निर्णय लेने के पक्ष में नहीं है। कुछ प्रभावशाली विधायकों और नेताओं के हस्तक्षेप के चलते मामला और उलझता नजर आ रहा है है ऐसे में सीएम गहलोत कभी भी नहीं चाहेंगे कि उनके निर्णय की शिकायत हाईकमान तक पहुंचे। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राम लुभाया की अध्यक्षता में नए जिले बनाने की कमेटी को करीब 60 शहरों को जिला बनाने के प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर प्रस्ताव गंभीर किस्म के नहीं हैं। कमेटी को जो तर्क मिले हैं, वे भावुक ज्यादा हैं, प्रशासनिक हिसाब से खरे नहीं उतरते। यदि विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में 6 या 7 जिले बन सकते थे । जिनकी मांग वर्षो पुरानी है और निर्णय नहीं हो पा रहा है। भाजपा ने भी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी  परमेश चंद्र के अध्यक्षता में नए जिले की बनाने की कमेटी बनाई थी । लेकिन उसकी रिपोर्ट भी सामने नहीं आ सकी सकी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कांग्रेस की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य भंवर जितेंद्र सिंह कोटपूतली को जिला बनाने के पक्ष में नहीं है वे चाहते हैं बहरोड़ जिला बने। जबकि गृह राज्य मंत्री राजेंद्र यादव की कोशिश है कि किसी तरह से कोटपूतली जिला बन जाए। भिवाड़ी को भी जिला बनाने जाने के चर्चा प्रशासनिक स्तर पर अधिक है। उसके पीछे एक ही बात कही जा रही है कि दिल्ली के नजदीक होने के कारण वहां की स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए जिला बनाया जाना आवश्यक है। कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर नव गठित स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य डॉ. रघु शर्मा केकड़ी से विधायक भी हैं । वे जब पिछली बार विधायक थे तब 2008 से 2013 के बीच उन्होंंने वादा किया था कि वे केकड़ी को जिला बनाएंगे। सीएम गहलोत के राजनीतिक सलाहकार और दूदू से निर्दलीय विधायक बाबूलाल नागर दूदू को जिला बनाने के लिए पैरवी कर रहे हैं। वे कमेटी को स्वयं ज्ञापन भी सौंप चुके हैं, लेकिन उनके तर्क प्रशासनिक हिसाब से वाजिब नहीं। वे अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र से अरांई को दूदू में मिलाना चाहते हैं, जबकि अरांई बतौर विधानसभा किशनगढ़ में शामिल हैं। ऐसे में अरांई को जिला प्रशासन और विधानसभा के हिसाब से दो अलग-अलग क्षेत्रों में बांटा नहीं जा सकता। नागर ने दूसरा तर्क टोंक जिले के मालपुरा को दूदू में मिलाने के लिए दिया है। टोंक स्वयं मात्र चार विधानसभा क्षेत्रों का एक छोटा सा जिला है। बंटवारा बड़े जिलों में किया जाता है ना कि छोटे जिलों में। मालपुरा का एक बड़ा हिस्सा टोडारायसिंह है। ऐसे में मालपुरा को जिले के हिसाब से दूदू और विधानसभा के हिसाब से टोडारायसिंह और टोंक में विभाजित नहीं किया जा सकता। किशनगढ़ के निर्दलीय विधायक सुरेश टांक का कहना है कि किशनगढ़ या अराई का कोई भी हिस्सा दूदू में नहीं जाने दिया जाएगा।‌ दूदु को जिला बनाने की माग अव्यावहारिक है। नागौर प्रदेश का  सबसे बड़ा जिला है। इसमें 11 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से डीडवाणा, मकराना, कुचामन, नावां, मेड़ता, लाडनूं में जिला बनाने की मांग हो रही है। जिले के सर्वाधिक प्रभावशाली नेता और सरकारी उप मुख्य सचेतक महेन्द्र चौधरी नावांं-कुचामन से विधायक हैं। उनकी सरकार में खूब सुनी जाती है, लेकिन उन्होंने भी अधिकृत रूप से नावां-कुचामन को जिला बनाने के लिए कोई मांग नहीं की है। वे इस मामले में पूरी खामोशी बरते हुए हैं।झुन्झुनूं जिले के खेतड़ी से विधायक मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जितेंद्र सिंह हैं। उदयपुरवाटी से विधायक राजेन्द्र सिंह गुढ़ा सैनिक कल्याण राज्यमंत्री हैं। सीकर के खंडेला से विधायक और किसान आयोग के अध्यक्ष महादेव सिंह गहलोत के और नीमकाथाना से विधायक और उद्योग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुरेश मोदी सचिन पायलट के खास हैं। चारों विधानसभा क्षेत्र एक-दूसरे से सटे हुए हैं। किसी एक को भी जिला बनाने पर अन्य क्षेत्रों में जनता की नाराजगी सरकार को झेलनी पड़ेगी। राजेंद्र गुढ़ा और सुरेश मोदी एक-दूसरे के खिलाफ बयान भी दे चुके हैं। ब्यावर सबसे बड़ा शहर है। लेकिन अब तक जिला नहीं बना है। वहां से भाजपा के विधायक शंकर सिहं रावत विगत 15 वर्षों में 50 बार से अधिक बार विधानसभा में ब्यावर को जिला बनाने की मांग कर चुके हैं। 2003 से लेकर अब तक लगातार चार बार यहां से भाजपा ही चुनाव जीत रही है। ऐसे में कांग्रेस सरकार ब्यावर को जिला बनाकर भाजपा को लाभ नहीं देना चाहेगी। ब्यावर को जिला बनाने के लिए आसींद (भीलवाड़ा) को जैतारण (पाली), भीम (राजसमंद) को तोड़ने की बात भी कही जा रही है। इससे तीनों जिलों के संसदीय क्षेत्र, विधानसभा क्षेत्र, जिला क्षेत्र प्रभावित होते हैं, जो फिलहाल लगभग संभव नहीं है। बाड़मेर जिले के पचपदरा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक मदन प्रजापत हैं। वे विगत एक वर्ष से जूते नहीं पहन रहे हैं। वे अपने क्षेत्र के एक शहर बालोतरा को जिला बनवाना चाहते हैं। बाड़मेर जिले के दो ताकतवर राजनेता गुढ़ामालानी से विधायक वन मंत्री हेमाराम चौधरी और बायतू से विधायक और कांग्रेस की केन्द्रीय स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य हरीश चौधरी इस मांग पर पूरी तरह चुप्पी साधी हुई हैं।

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