चितौड़गढ़ में सीएम गहलोत की इंदिरा रसोईघर योजना लापरवाह अधिकारियों की वजह से तोड़ रही दम।

चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कोई भूखा ना सोए की मंशा के अनुरूप इंदिरा रसोई योजना की शुरुआत की गई। जिसमें चित्तौड़गढ़ में कुल 6 स्थानों पर इंदिरा संचालित की जा रही है। लेकिन अब नगर परिषद के उदासीन रवैए के चलते यह योजना धीरे-धीरे दम तोड़ती हुई दिखाई दे रही है। जिसमे 2 काउंटरो पर अब ताला लटका हुआ दिखाई दे रहा है।
वहीं कुछ अन्य स्थानों पर भी आमजन के नहीं पहुंचने से ताले लटकने की नौबत दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार चित्तौड़गढ़ में 20 अगस्त 2020 को पूरे प्रदेश में एक साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा के अनुरूप नगर परिषद और मेवाड़ विकलांग संस्था के संयुक्त तत्वावधान में इंदिरा रसोई योजना की शुरुआत की गई थी। जिसमें चित्तौड़गढ़ को भी दो स्थानों रोडवेज बस स्टैंड और राजकीय जिला चिकित्सालय परिसर में इंदिरा रसोई की सौगात दी गई थी। 
इसके पश्चात दूसरे चरण मे 9 सितंबर 2022 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 6 अन्य स्थानों गायत्री बाई फुले सब्जी मंडी परिसर, पीजी महाविद्यालय परिसर,चंदेरिया औद्योगिक क्षेत्र, किला रोड, रेलवे स्टेशन के समीप और प्राइवेट बस स्टैंड पर इंदिरा रसोई की शुरुआत की गई। जिसमें योजना के लिए जगह का चुनाव सही नहीं किए जाने के चलते अभी डेढ़ माह में पूरा नहीं हुआ। इसी कारण महाराणा प्रताप महाविद्यालय परिसर और प्राइवेट बस स्टैंड में शुरू की गई, इंदिरा रसोई काउंटरो पर ताले लटक लटक गए हैं। वही आमजन का इस योजना के प्रति रुझान खत्म होने के चलते अन्य स्थानों के काउंटर भी ताला लटकने की नौबत शीघ्र आने की संभावना दिखाई दे रही है। इसके बारे में पड़ताल में सामने आया है कि इस योजना में इंदिरा रसोई काउंटर पर जाने वाले लाभार्थी से ₹8 लिए जाते हैं और नगर परिषद की ओर से ₹17 विकलांग संस्था को अनुदान के रूप में दिए जा रहे हैं और इसी ₹17 के अनुदान के खेल में बंद काउंटर को भी किसी न किसी तरह से चालू हालत में बताकर अनुदान उठाया जा रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन के आला अधिकारी इस अनुदान के पीछे के बड़े खेल मे शामिल लोग जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की महत्वकांक्षी योजना को पलीता लगा कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं उनके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई करते हैं।

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