समय से पहले सिमटा दशहरा मेला, नगर परिषद की घोर लापरवाही आई सामने।

चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
चित्तौड़गढ़ में इन दिनों नगर परिषद की ओर से करीब सवा करोड़ के बड़े बजट के साथ दस दिवसीय दशहरा मेला का आयोजन इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी ऑडिटोरियम में किया जा रहा है। जिसमें प्रथम दिन दशहरे को छोड़कर उसके बाद से लगातार इस मेले में आमजन का जुड़ाव कम होता दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से चित्तौड़गढ़ में लगातार हो रही मध्यम से तेज दर्जे की बरसात ने भी इस मेले का मजा फीका कर दिया है।
इस बरसात के कारण मेले में अपना व्यवसाय कर रहे हैं दुकानदारों को भी अपने माल को बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी है। इसके साथ ही तेज बरसात के कारण दुकानों में रखे सामान भी गीले होने से नुकसान भी उठाना पड़ा है। लेकिन नगर परिषद की ओर से उनके लिए मदद का किसी भी तरह का हाथ अभी तक नहीं उठाया है। जबकि लगभग सभी दुकानदारों ने 10 दिन का किराया अग्रिम जमा कराया है। इसलिए दुकानदार नगर परिषद के खिलाफ खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।चित्तौड़गढ़ में नगर परिषद की ओर से करीब सवा करोड़ बजट का दशहरे के दिन शुरू हुआ। इस 10 दिवसीय दशहरा मेला मे आमजन की लगातार गिरावट दर्ज हुई है। वही मेले मे आयोजित रंगारंग कार्यक्रमों की रूपरेखा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जिसमें जिस तरह से कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए कलाकारों का चयन किया गया है। वह भी आमजन को मेला प्रांगण तक खींचने में नाकाम रहे हैं। अब तक तो दशहरे मेले में जितने भी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी है वह भी आमजन को पूरे समय तक बांधने में असफल रहे हैं। और आने वाले दिनों में जिस तरह के नगर परिषद की ओर से बाहरी कलाकारों की प्रस्तुतियों को लेकर कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई गई है उससे यह नहीं लगता है कि आमजन का इन कार्यक्रमों के प्रति अधिक जुड़ाव होगा। क्योंकि नगर परिषद की ओर से आयोजित किए जा रहे करीब सवा करोड़ के दशहरा मेला आयोजन का प्रचार प्रसार सही तरिके से नहीं किया गया है। इस बारे मे जानकारी में सामने आया है कि कुछ चुनिंदा लोगों को प्रचार का काम दिया गया है। जिन्होंने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ईमानदारी के साथ इस मेले का प्रचार प्रसार नहीं किया। इसलिए आज मेले का आमजन से जुड़ाव कम दिखाई दे रहा है। जानकारी में यह भी सामने आया है कि रावण दहन के बाद जितने भी कार्यक्रम अभी तक प्रस्तुत किए गए हैं उसमें सिर्फ कुछ गिने-चुने पार्षदों ने ही इन कार्यक्रम का लुफ्त उठाया है। जोकि इस मेले के आयोजन समिति में जुड़ाव रखते हैं। वही आमजन की भागीदारी नहीं होना कहीं ना कहीं प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा करता है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में इस मेले में नगर परिषद में अपना वर्चस्व रखने वाले रसूखदारो के बाहरी परिवारजनों को भी इसमें बड़े और महंगे काम दिए गए हैं। इससे यह साफ जाहिर होता है कि नगर परिषद की ओर से इस मेले के आयोजन की औपचारिकताए पूरी की जा रही है। क्योंकि अगर इस मेले का आयोजन पूरी इमानदारी और निष्ठा के साथ किया जाता साथ ही इसका प्रचार-प्रसार सही ढंग से किया जाता तो आमजन की भागीदारी इस मेले में बड़ी मात्रा में देखने को मिलती। जिस तरह से पिछले कई वर्षों में देखने को मिली।

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