छात्रा की सुसाइड मामले को रफा दफा करने में जुटा युनिवर्सिटी प्रशासन।

चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार तहसील में संचालित हो रही मेवाड़ यूनिवर्सिटी परिसर में शनिवार सवेरे गर्ल्स हॉस्टल के कमरे में कश्मीरी छात्रा आफरीन फिरदोस द्वारा फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कि घटना घटित होने के बाद एक बार फिर से यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले को रफा-दफा करने में लगा हुआ है। जिस तरह से पहले की घटनाओं को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपने रुतबे के चलते रफा-दफा किया था। लेकिन मृतका आफरीन फिरदोस के परिजनों ने इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन पर लापरवाही के साथ गैर जिम्मेदाराना रवैया रखने का भी साफ-साफ आरोप लगाया है।
शनिवार को यह घटना घटित होने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन का एक भी उच्च अधिकारी जिला राजकीय चिकित्सालय की मोर्चरी तक नहीं पहुंचा और मामले को दबाने के लिए कुछ कर्मचारियों को मौके पर भेजा। वहीं मृतका के शव का पोस्टमार्टम करा शव उसके परिजनों को सौंप कर गांव के लिए रवाना किया गया है। दरअसल आत्महत्या स्थली के नाम से अपनी पहचान रखने वाली मेवाड़ यूनिवर्सिटी में शनिवार को करीब 2 महीने के बाद एक बार फिर से कश्मीरी छात्रा आफरीन फिरदोस द्वारा अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है और इस पूरे मामले को मेवाड़ यूनिवर्सिटी प्रशासन पहले के मामलों की तरह दबाने में लगा हुआ है। जिस तरह के पहले के मामलों में देखा गया है कि जिस तरह की घटनाएं इस यूनिवर्सिटी परिसर में घटित हुई है एक भी मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है और अभी तक या ठंडे बस्ते में ही दिखाई दे रही है। इस मामले में भी यूनिवर्सिटी प्रशासन का रवैया इसी तरह दिखाई दे रहा है। लेकिन मृतक छात्रा आफरीन फिरदोस के परिवारजनों ने इस मामले में हत्या की आशंका जताई है। साथ ही यूनिवर्सिटी प्रशासन पर भी उन्होंने लापरवाही करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों ने बताया कि जिस तरह से आफरीन फिरदोस ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से यूनिवर्सिटी में ही अध्ययनरत कश्मीरी छात्र मुंताह द्वारा लगातार परेशान किए जाने की शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते उसका हौसला बुलंद होता गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि आफरीन को फांसी के फंदे पर लटकना पड़ा। वही यह पहला मामला नहीं है कि इस यूनिवर्सिटी परिसर में छात्र छात्राओं द्वारा आत्महत्या की गई हो। इससे पहले कई बार  छात्र-छात्राओं के आत्महत्या करने के मामले सामने आए हैं। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा अपने रुतबे के चलते सारे मामलों को दबा दिया गया और जांच को लगभग समाप्त कर दिया गया। जानकारी में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी के हॉस्टल परिसर में सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगे हुए हैं जिसके कारण कहीं ना कहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन कटघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। पहले और इस आत्महत्या से जुड़े मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन के एक अधिकारी द्वारा परिसर में एक भी आत्महत्या का मामला नहीं होने की बात कही। जबकि गंगरार थाने में इस यूनिवर्सिटी के खिलाफ कई मामले दर्ज है। लेकिन कहीं ना कहीं पूरा मामला मिलीभगत का जान पड़ता है। जिसकी ईमानदारी के साथ जांच होना अत्यंत आवश्यक है। जिससे कि निकट भविष्य में अपने सपनों को संजोए छात्र-छात्राएं जो इस यूनिवर्सिटी में अपना भविष्य बनाने के लिए आते हैं उन्हें अपनी जान से हाथ ना धोना पड़े।

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