अफसरों को अवार्ड देकर जनता को साधेंगे गहलोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश में एक नई शुरुआत करने वाले हैं। देश में राजस्थान पहला राज्य बनने वाला है, जहां बेहतरीन कार्य करने वाले सरकारी अफसरों-कार्मिकों को मुख्यमंत्री एक्सीलेंसी अवार्ड दिया जाएगा। इस अवार्ड की शुरुआत आईएएस काडर से होगी और चरणबद्ध तरीके से सामान्य पदों के कार्मिकों तक यह अवार्ड दिए जाएंगे। अभी राजस्थान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे किसी अधिकारी-कर्मचारी के शानदार काम करने पर उसे पुरस्कृत किया जाता हो। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने गत दिनों एक सम्पूर्ण प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री गहलोत को भिजवाया है, जिसे गहलोत ने प्रशासनिक मंजूरी दे दी है।

इस प्रस्ताव के तहत सबसे पहले आईएएस अफसरों का चयन किया जाएगा। उसके बाद आरएएस अफसरों का चयन होगा और फिर डॉक्टर, शिक्षक और विभिन्न विभागों में कार्यरत इंजीनियर्स का नम्बर आएगा। उसके बाद विभागों ने विभिन्न ग्रेड में कार्यरत कर्मचारियों के नाम मांगे जाएंगे।

इस योजना का मोदी एंगल 

इस अवार्ड का प्रस्ताव यूं तो सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से तैयार हुआ है, लेकिन असल में यह प्रस्ताव एक ऐसे आईएएस अफसर ने बनाया है, जो स्वयं प्राइम मिनिस्टर एक्सीलेंसी अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। वे गहलोत के पसंदीदा अफसरों में से एक हैं और पूर्व में भी कुछ शानदार योजनाओं को गहलोत की पहल पर मूर्त रूप दे चुके हैं। इस अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि आम तौर पर सरकारी कर्मचारियों को तो फिर भी विभागीय स्तर पर उच्चाधिकारी सम्मानित या पुरस्कृत कर देते हैं, लेकिन जो स्वयं उच्च पदों पर कार्यरत अफसर हैं, उन्हें कौन पुरस्कृत करे। ऐसे में स्वयं मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया है कि चीफ मिनिस्टर एक्सीलेंसी अवार्ड नाम से एक पुरस्कार शुरू किया जाए। यह अवार्ड मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव जैसे शीर्ष आईएएस काडर के पदों से लेकर सुदूर गांव-ढाणी में कार्यरत सामान्य कर्मचारी तक को दिया जाएगा।

अवार्ड से पहचान मिलेगी

चीफ मिनिस्टर एक्सीलेंसी अवार्ड को शुरू करने के पीछे मुख्यमंत्री गहलोत की मंशा सभी सरकारी अफसरों और कार्मिकों को जनता की सेवा के लिए बेहतरीन कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना है। वे चाहते हैं कि चीफ मिनिस्टर एक्सीलेंसी अवार्ड से जिन्हें सम्मानित किया जाए उनसे प्रेरणा लेकर सरकारी सेवा में कार्यरत अन्य लोग भी अच्छा काम करने के लिए आगे आ सकें। सरकारी कार्मिकों को वेतन व पदोन्नति के अतिरिक्त इस अवार्ड से अलग से पहचान मिल सकेगी। जो कार्य वे करते आ रहे हैं, जैसे पुलिस, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, शिक्षा आदि में उनकी पहचान प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर बतौर विशेषज्ञ हो सकेगी। पुरस्कृत होने वाले अफसरों की तरह काम करने के लिए अन्य सरकारी कार्मिकों में भी उत्साह जगेगा तो एक स्वस्थ प्रतियोगी माहौल सरकारी सेवाओं में भी विकसित हो सकेगा।

अवार्ड के पीछे गहलोत को सोच 

सीएम गहलोत इस अवार्ड व्यवस्था के माध्यम से ब्यूरोक्रेसी को एक पॉजिटिव सन्देश देना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनकी फ्लैगशिप योजनाओं का क्रियान्वन अफसर जमीनी स्तर पर मजबूती से करें खासकर आने वाले चुनावी साल में। निश्चित ही चुपचाप अपनी जिम्मेदारी निभा रहे अफसरों के लिए यह अवार्ड योजना बूस्टर का काम करेगी।  साथ ही इससे ब्यूरोक्रेसी की छवि भी सुधरेगी।  इसी के साथ परोक्ष रूप से यह सन्देश भी जनता तक पहुंचेगा कि गहलोत सरकार में अफसर काम करते हैं। 


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