राजीविका ने बदली रेखा की जीवन रेखा,अब हर माह कमा रही 15 हजार रूपए।

डूंगरपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
डूंगरपुर जिले के दामड़ी गांव की निवासी रेखा सेवक अपने पति व दो बच्चों में के साथ रहती है। वह राजीविका के स्वयं सहायता समूह से 2015 में जुड़ी और समूह से ऋण लेकर कपड़ों की दुकान का अपना व्यवसाय प्रारंभ किया। कुछ समय बाद समूह से ऋण प्राप्त कर ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय भी शुरू किया। आज सेवक का परिवार अपने दोनों व्यवसायों से 12 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही है।
विपरीत परिस्थितियों से लड़कर किया जय अंबे स्वयं सहायता समूह का गठन।
आर्थिक तंगी के हालातों से गुजर रही रेखा के परिवार का खेती के अलावा आय का कोई अन्य स्रोत नहीं था। तंगी के कारण इन्हें अपने संयुक्त परिवार से अलग होना पड़ा। पति नशे के आदी और बेरोजगार थे। एसे में रेखा सेवक के लिए बच्चों का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया था। राजीविका परियोजना के तहत चलाए जा रहे स्वयं सहायता समूह अभियान से इनके गांव दामड़ी में सीआरपी टीम द्वारा सर्वे किया जा रहा था, तब सीआरपी टीम द्वारा समूह से जुड़ने के लाभ बताए गए कि वे कैसे स्वयं सहायकता समूह से जुड़कर आर्थिक स्वावलम्बन की दिशा में आगे बढ़ सकती है। सितंबर 2015 में रेखा के साथ 12 महिलाओं ने मिलकर जय अंबे स्वयं सहायता समूह का गठन किया।
बचत और सूक्ष्म ऋण से किया आपसी लेनदेन।
समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं ने 25-25 रुपए की बचत करनी प्रारंभ की और आपसी लेनदेन सूक्ष्म ऋण के माध्यम से होने लगा। इस ऋण का उपयोग घर खर्च व प्रारंभिक आवश्यकताओं पर किया गया। फिर समूह को राजीविका के द्वारा टी 1 व टी 2 के फंड के रूप में सहायता मिलने के पश्चात बड़े ऋण के रूप में लेनदेन प्रारंभ हो गया। धीरे-धीरे समूह में आपसी लेनदेन से ब्याज और बचत से पैसा बढ़ने लगा। वर्ष 2017 में रेखा ने 50 हज़ार की राशि का प्रथम ऋण लेकर अपने कपड़ों की दुकान के व्यवसाय में लगाया। धीरे-धीरे कपड़े का व्यवसाय चलने लगा और परिवार की हलात में थोड़ा सुधार होने लगा। 
अभाव को बनाया अवसर।
रेखा सेवक ने महसूस किया कि गांव में कोई ब्यूटी पार्लर नहीं है एवं गांव की महिलाओं को इसके लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है या डूंगरपुर मुख्यालय जाना पड़ता है। रेखा ने ब्यूटी पार्लर संबंधी जानकारी जुटाकर ब्यूटीशियन का कोर्स किया और 2018 में एक लाख रुपए का ऋण लेकर ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय प्रारंभ किया। वर्तमान में रेखा सेवक अपने दोनों व्यवसायों से 12 से 15 हज़ार रुपए प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही है। रेखा का पति जो नशे का आदी था वह भी रेखा से प्रेरित होकर वाहन चलाने लगा है तथा परिवार को सहायता कर रहा है।

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