प्रशासनिक व राजनैतिक संरक्षण से भूमाफिया के हौसले बुलंद, 92 बीघा भूमि पर किया कब्जा।

बीकानेर ब्यूरो रिपोर्ट।
जब पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्त्वय से विमुख हो जाएं तो पीड़ित न्याय की उम्मीद किससे करे। ऐसा ही बच्छासर रोड स्थित करमीसर गांव के कई गरीब परिवारों के साथ पेश आ रहा है, जो कि संभागीय आयुक्त, आईजीपी तक गुहार लगा चुके हैं। हालांकि मुख्यमंत्री के विजिलेंस सेल में शिकायत भेजने के बाद इस संबंध में मुकदमा तो दर्ज हो गया मगर जांच के नाम पर नतीजा शून्य है। अब इस मामले में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने मोर्चा संभाल लिया है। राजस्थान जाट महासभा के प्रदेश महासचिव व भाकियू (टिकैत) के बीकानेर संभाग अध्यक्ष महेंद्र भाकर ने संभागीय आयुक्त के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। महेंद्र भाकर ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि बच्छासर रोड, करमीसर में उपनिवेशन खसरा 169 जिसका राजस्व खसरा 88/60 बनता है, 23 अक्टूबर-2022 की रिपोर्ट पटवारी के अनुसार यह साढे 92 बीघा भूमि अराजीराज है। करीब 200 करोड़ रुपए की इस भूमि पर राजनैतिक संरक्षण में लगातार बड़े-बड़े कब्जे हो रहे हैं। भूमाफिया अपने-अपने हिसाब से फर्जी एग्रीमेंट बनाकर इस पर कब्जे कर रहे हैं।पिछले एक महीने में अनेकों शिकायतें करने पर भी राज बल व धन बल के पीछे प्रशासन मौन है। पुलिस आती है, पटवारी निरीक्षण करतें हैं परंतु एसडीएम भूमिधारक तहसीलदार और इन सबके मालिक जिला कलेक्टर इन शिकायतों पर कार्रवाई करना तो दूर गौर करना ही मुनासिब नहीं समझते हैं। थाना पुलिस नाल तो ‘बिल्ली को दूध की रखवाली वाली’ कहावत को चरितार्थ कर रही है। इस मामले में शिकायतकर्ता विजय कुमार जाट, हेमाराम जाट, जगदीश जाट आदि ने अनेकों बार स्वयं उपस्थित होकर, टेलीफोन व लिखित में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। इन शिकायतों पर कार्रवाई की बजाय थाने के जांच अधिकारी माफिया को अपने संरक्षण में कब्जे करवा रहे हैं। मामले की शिकायत सीएम बिजलेंस को ईमेल के जरिए करने पर वहां से निर्देश के बाद नाल पुलिस ने 4 नवंबर-2022 को मुकदमा नं.-0178/22 तो दर्ज कर लिया परंतु जिन पुलिस अधिकारियों (एसआई हंसराज व एएसआई बाबुलाल) ने पुलिस संरक्षण में कब्जा करवाया, उन्हें ही मामले की जांच सौंप दी। वहीं, दूसरी ओर संभागीय आयुक्त के निर्देश पर नाल पुलिस ने धारा 145 के तहत एसडीएम कोर्ट में इस्तगासा दायर किया, जिस पर केवल कुर्की के नोटिस जारी करके खानापूर्ति कर दी गई है। इतना सब होने के बावजूद माफिया लगातार कब्जे कर रहा है। यहां तक कि इस भूमि पर धर्मकांटा तक लगाया जा रहा है। हल्का पटवारी रिपोर्ट के आधार पर अराजीराज यानी सरकारी जमीन होने के बावजूद उसे कब्जा मुक्त कराने की बजाय ये लोकसेवक अपने कर्तव्य का निवर्हन नहीं कर रहे हैं। यूनियन मामले को उच्च स्तर पर उठायेगी। इसके लिए संगठन का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री व स्वायत शासन मंत्री से मिलकर उन्हें ज्ञापन देगा।

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