जब आंतों में खलबलाहट होती हो - डॉ. रामावतार शर्मा

लोग अक्सर पेट में फुलावट, गैस बनने की परेशानी, दर्द , कब्ज या बार बार बाथरूम उपयोग की भावना आदि शिकायत करते रहते हैं। इस बारे में वे तरह तरह की जांच करवाते हैं, कितनी ही तरह की दवाइयां सेवन करते हैं जिनसे जीवन पर कई विपरीत प्रभाव पड़ते हैं। चूंकि कोई भी जांच कोई ठोस निदान नहीं कर पाती है तो इस व्याधि को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम ( आई बी एस ) कहा जाता है।

यह एक ऐसा रोग है जहां विभिन्न चिकित्सा पद्धति के लोग बड़े दावे करते हैं पर सत्य तो यह है कि इस रोग के होने के कारणों का किसी को निश्चित तौर पर पता नहीं है। कुछ लोगों में कोई बैक्टेरिया या फिर दुग्ध उत्पाद बीमारी को बढ़ा सकते हैं पर कारण नहीं होते हैं।

यह रोग तनावग्रस्त लोगों में ज्यादा होता है पर तनावमुक्त लोगों में भी पाया जाता है तो ऐसा लगता है यह रोग तनाव को जन्म देता है या बढ़ा देता है पर यह सिर्फ उसकी वजह से नहीं होता है। तनाव से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप तनाव का सामना कैसे करते हो। तनाव आपकी आंतों में सूक्ष्म स्तर के कई स्थाई परिवर्तन कर देते हैं जो बाद में कभी सही नहीं होते और आप को जीवनपर्यंत तकलीफ उठानी पड़ सकती हैं। तनाव का सबसे बड़ा कारण आपकी अथाह कामनाएं तथा वासनाएं होती हैं इसलिए इन पर लगाम लगाने का लगातार अभ्यास जारी रहना चाहिए। 

आई बी एस का निदान चिकित्सक के अनुभव से ही होता है। तरह तरह की महंगी जांचे किसी निश्चित निदान पर नहीं पहुंचती हैं। इस रोग से पूर्ण मुक्ति संभव नहीं है पर जीवनशैली में परिवर्तन से काफी राहत प्राप्त की जा सकती है। इलाज सस्ता होगा वो ही बेहतर होगा क्योंकि रेशेदार भोजन, प्रोबायोटिक्स और अनुभवी चिकित्सक से संवाद ही सबसे बेहतरीन इलाज है। अपने आप को बदलने की क्षमता विकसित करना बड़े फायदे की बात हो सकती है।

 कुछ सामान्य सी दवाएं भी सहायक होती हैं पर विभिन्न विज्ञापित या व्हाट्सएप पर प्रसारित विधियां तकलीफ को बढ़ा सकती हैं इसलिए इनसे बचना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

 आई बी एस उच्च और मध्य वर्ग में हो पाया जाता है, गरीब या सूचनामुक्त लोगों में नहीं होता है इसलिए मिथ्या सूचनाओं का आनंद लेना बंद कीजिए।

उपवास कोई ज्यादा फायदेमंद नहीं पाया गया है बल्कि ज्यादा उपवास शरीर में कई तत्वों की कमी और कर देता है। वैसे उपवास का भोजन से कोई संबंध नहीं होता है। उपवास का मतलब है जब आपका मन आपकी चेतना से उप हो हो यानि मन चेतना के आधीन कार्य करे। यदि ऐसा ना कर सके तो :-

     अपने घरों के कर दिए आंगन लहू लहू

     हर शख्स मेरे शहर का काबील हो गया।

     ( हीरानंद सोज)

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