ऑल डोइन्यो लेंगई, मसाई और ईश्वर का निवास - डॉ. रामावतार शर्मा

उत्तरी तंजानिया में कुछ अर्ध खानाबदोश लोग बसते हैं जिन्हे मसाई कहा जाता है। ये लोग अफ्रीका की बड़ी झीलों के आस पास बसते हैं और विशिष्ट प्रकार के कपड़े पहनते हैं जिनके कारण ये उस क्षैत्र के सबसे प्रसिद्ध खानाबदोश हैं। मसाई क्षैत्र में एक बड़ा प्रसिद्ध पहाड़ है जिसे ऑल डोइन्यो लेंगेई कहा जाता है। इसका स्थानीय भाषा में मतलब होता है ईश्वर की निवास का पर्वत। यह कुछ वैसा ही जैसा कैलाश मानसरोवर को लेकर हिंदुओं की मान्यता है। पर यह भूभाग एकदम बंजर है सिवाय इक्का दुक्का नागफणी और बौने बुआबाब के पेड़ों के।

यह पहाड़ ज्वालामुखी का घर है जो सुर्ख लावा की बजाय उबलती राख को बाहर फेंकता रहता है जो कि ब्लीचिंग सोडा से भरी हुई होती है। यह ज्वालामुखी बड़े रूप में 1966 - 67 में फूटा था पर तब से लेकर अब तक इसकी राख की भट्टी अब भी उफान खा रही है। ज्वालामुखियों की राख से क्षारीय ( एल्कलाइन ) हुई भूमि में कोई भी वनस्पति नहीं उग सकती। पर बरसात में घास काफी मात्रा में उगती है जिसे खाने के लिए हिरण, जेब्रा आदि जानवर आते रहते हैं। चारों तरफ फैले पानी के क्षारीय दलदल में कई मछलियां भी पनपती हैं और एल्गी प्रचूर मात्रा में विकसित होती है जिसे खाने के लिए लाखों की संख्या में फ्लेमिंगो पक्षी आते हैं। दशकों पहले आज का मुंबई फ्लेमिंगो का चहेता स्थान हुआ करता था।

     मसाई लोग मानते हैं कि धरती की पहली मनुष्य माता इसी इलाके में प्रकार हुई थी और उसने कई संतानों को जन्म दिया। एक दिन ईश्वर जो इस पहाड़ पर रहता था और जिसका नाम एंगे था उसने उस मां को चांद और अपनी संतान के बीच एक तो चुनने को कहा। मां ने अपने बच्चों का बलिदान देकर चांद को बचाया ताकि धरती पर मानव और अन्य जीवन सुरक्षित रह सके। मसाई लोगों का मानना है कि उफनती राख की भट्टी में ही एंगे निवास करता है। ये लोग पूर्णतः मांसाहारी हैं और जानवर का रक्त या तो सीधे ही पी जाते हैं या फिर उसे दूध में मिलाकर पीते हैं। इसको वे धरती का सबसे शक्तिशाली पेय मानते हैं। मसाई युवक जब तक सिद्ध नहीं कर देता कि वह वीर योद्धा है उसका विवाह नहीं हो सकता है क्योंकि यहां के हालातों में कमजोर लोगों का जीना संभव नहीं है।

 

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