विभागीय योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पहुंचे इसके लिए सख्त मॉनिटरिंग आवश्यक-मंत्री रमेश मीना।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री रमेश चन्द मीना ने कहा है कि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की योजनाएं ग्रामीण क्षेत्र में अंतिम छोर पर स्थित गरीब को लाभ देने वाली योजनाएं हैं। इनमें लापरवाही करना राज्य सरकार की मंशा और निर्देश के खिलाफ है। विभागीय योजनाओं की समुचित मॉनिटरिंग नही होने से नाराज  मीना ने राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटी बनाने, अधिकरियों को लगातार फील्ड में जाकर योजनाओं की वास्तविक क्रियान्विति देखने और लापरवाह एवं भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, विकास अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। मीना इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान में विभागीय आधिकारियों की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की समीक्षा करते हुए मीना ने इस बात पर नाराजगी जताई कि गांव में व्यक्तिगत शौचालय के लिए पात्र कई परिवारों को अभी तक पैसा नही मिला है, सामूहिक शौचालय मेंटीनेंस के अभाव में काम नहीं आ रहे। प्रचार-प्रसार एवं प्रशिक्षण के नाम पर अनावश्यक रूप से पैसा खर्च किया गया। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के कार्याें पर पिछले वर्षों में हुए कार्यों पर असंतोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि गांवों की आबादी के अनुसार तीन श्रेणियां बनाकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार शहरों की तरह सफाई व्यवस्था के प्रयास किए जाएं। धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर ठोस एवं कचरा प्रबन्धन एवं उन्हें प्लास्टिक मुक्त बनाने से सम्बन्धित अभिनव योजना ‘‘लाइट हाउस’’ की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इन स्थलों का गंदगी से मुक्त होना अच्छी बात है लेकिन योजना की निरंतरता के लिए सम्बन्धित संस्थान या ट्रस्ट से एमओयू तभी किया जाए जब उसके द्वारा डम्पिंग यार्ड या प्लांट के लिए भूमि सम्बन्धित ग्राम पंचायत के नाम की जाए। इसके अलावा योजना का लाभ अन्य स्थानीय लोगों को भी मिलना चाहिए।जलग्रहण क्षेत्र विकास की योजनाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि जलग्रहण एवं भूमि विकास के कार्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जानकारी में एवं भूजल में अभिवृद्धि के अपने उद्देश्य को पूरा करने वाले होने चाहिए।उन्होंने बताया कि ऐसी शिकायतें मिली हैं कि 2013 की एलडीसी भर्ती में जिला परिषदों द्वारा अलग-अलग आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जा रहा है और इसी तरह कैडर प्रमोशन में भी कहीं ज्वाइनिंग को आधार मान लिया गया है औ कहीं आयु को, इनमें एकरूपता लाई जाए। मनरेगा कार्याें में व्यक्तिगत लाभ के कार्य कम स्वीकृत किए जाने को लेकर भी मीना ने नाराजगी व्यक्त की एवं इसकी जांच के लिए कहा। कई जिलों में कैटलशेड का दुरूपयोग करने एवं ग्रेवल सड़क की निर्माण सामग्री मेें गड़बड़ी की जांच को कहा। जांच में दोषी मिलने पर रिकवरी के निर्देश दिए। उन्होंने बड़ी ग्राम पंचायतों में भूमि उपलब्धता के अनुसार भव्य पार्काेेें के निर्माण पर जोर दिया। साथ ही महिला मैट में पचास प्रतिशत महिलाएं राजिविका सदस्यों में से लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने बजट घोषणाओं की क्रियान्विति, पन्द्रहवां वित्ती आयोग एवं राज्य वित्त आयोग, मुख्यमंत्री ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, महात्मा गांधी विकास पथ, कोटा क्षेत्र में भारमाला परियोजना के लिए तालाबों की मिट्टी काटने से हुए नुकसान की भरपाई सहित कई योजनाओं एवं प्रकरणों में अधिकारियों को निर्देश प्रदान किए। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने स्वामित्व योजना में आबादी क्षेत्र में पट्टे डिजिटली जारी करने एवं उनका रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए। साथ ही कर्मचरियों की बकाया डीपीसी कराने, स्थायी कर्मचारियों का डेटा राजकाज सॉफ्टवेयर पर चढाने, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं अम्बेडकर भवन निर्माण सहित अन्य विभागीय कार्यों की टाइमलाइन तय करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने 15वां वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग को बड़ी योजनाएं बताते हुए इनमें होने वाले व्यय की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। एसीएस ने स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में गांव का एक डे्रनेज प्लान तैयार करने एवं ग्रेवल सड़क निर्माण में स्थानीय सामग्री के अनुसार बीएसआर तैयार करने को कहा। ग्रामीण विकास विभाग की शासन सचिव मंजू राजपाल ने नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पंजशाला, अमृत सरोवर सहित ग्रामीण की विभिन्न योजनाओं के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण दिया। पंचायती राज विभाग के शासन सचिव नवीन जैन ने स्वामित्व योजना, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान, ग्राम पंचायत मिनी सचिवालय, ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति भवनों के निर्माण, अम्बेडकर भवन, विलेज मास्टर प्लान, स्वच्छ भारत मिशन, पन्द्रहवा वित्त आयोग, राज्य वित्त आयेाग सहित पंचायती राज की विभिन्न योजनाओं के लक्ष्य एवं भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की जानकारी दी। बैठक में नरेगा कमिश्नर शुभांगी स्वर्णकार, निदेशक पंचायती राज डॉ.प्रतिभा सिंह,  ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ARwebTrack