हर घर जल कनेक्शन के तय लक्ष्य हासिल करने में वृहद परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
जल जीवन मिशन में 34 वीं राज्य स्तरीय परियोजना स्वीकृति समिति (एसएलएससी) तक प्रदेश के 39 हजार 521 गांवों में 93.87 लाख हर घर जल कनेक्शन की स्वीकृतियां प्राप्त कर ली गई हैं। प्रदेश में 30 लाख 52 हजार ग्रामीण घरों में जल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। कुल स्वीकृत 134 वृहद परियोजनाओं में से 86 परियोजनाओं के तहत 9234 गांवों में 22.21 लाख जल संबंधों के लिए 10 हजार 835 करोड रूपए के कार्यादेश जारी हो चुके हैं। अन्य योजनाओं (ओटीएमपी) में 14.793 गांवों में 35.26 लाख जल संबंधों के लिए निविदाएं आमंत्रित कर ली गई हैं। इनमें से 27.08 लाख जल कनेक्शन के लिए कार्यादेश भी जारी कर दिए गए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने मंगलवार को जल जीवन मिशन एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की विभिन्न पेयजल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। 
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जल जीवन मिशन में अधिक से अधिक हर घर जल कनेक्शन का लक्ष्य हासिल करने में वृहद परियोजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। कई वृहद परियोजनाओं की कम प्रगति पर उन्होंने संबंधित फर्मों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वृहद परियोजनाओं के कार्य तय समयावधि में पूरे हों यह सुनिश्चित करें। अधिकारियों ने बताया कि आगामी एसएलएसएससी में 4 वृहद परियोजनाओं की स्वीकृति प्रस्तावित है जिनसे प्रदेश के 1963 गांवों में तीन लाख जल संबंध जारी होंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि जल जीवन मिशन की गाइडलाइन के अनुरूप हर घर जल का सर्टिफिकेशन किया जाए। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक आयोजित ग्राम सभाओं मे 686 गांवों को हर घर जल प्रमाणित कर दिया गया। 486 गांवों के हर घर जल प्रमाण पत्र आईएमआईएस की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। कोटा, प्रतापगढ़ एवं सिरोही जिलों में हर घर जल प्रमाणीकरण शत-प्रतिशत हो चुका है। 
क्वालिटी कंट्रोल टीमें करें व्यापक दौरे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने विभिन्न परियोजनाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्वालिटी कंट्रोल टीमों द्वारा किए गए निरीक्षणों एवं पाइप सैम्पलिंग के बारे में जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने एवं निरीक्षण बढ़ाने के लिए सभी 58 नियमित एवं परियोजना खंडों में सर्कल स्तर की टीमों का गठन किया गया है। इसमें 37 नियमित वृत्त स्तरीय एवं 21 परियोजना वृत्त स्तरीय टीमें शामिल हैं। गुणवत्ता नियंत्रण शाखा द्वारा 1090 पाइप सैंपल लिए गए जिनमें से 879 की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। 879 में से 802 निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए जबकि 71 सैंपल फेल हो गए। शेष 211 सैंपल की लंबित जांच रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत की जाएगी। डॉ. अग्रवाल ने गुणवत्ता नियंत्रण दलों के दौरे बढ़ाने एवं कम गुणवत्ता की सामग्री काम में लेने पर संबधित के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल गुणवत्ता जांच के लिए 250 ब्लॉक में स्थापित की जा रही प्रयोगशालाओं के लिए स्थान चयन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक 194 प्रयोगशालाओं के लिए स्थान चयन कर लिया गया है।
जनता जल योजना के पंप चालकों का बकाया भुगतान 30 तक करें।
अधिकारियों ने बताया कि जनता जल योजना में कार्यरत 4435 अंशकालीन पंप चालकों की बैंक डिटेल एवं आधार कार्ड संबंधी जानकारी संबंधित खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा उपलब्ध करा दी गई हैं उनका बकाया मानदेय भुगतान कर दिया गया है। शेष 3500 पंच चालकों की डिटेल बीडीओ से प्राप्त होने के बाद पे-मैनेजर पर अपलोड कर उन्हें भी भुगतान शीघ्र किया जाएगा। एसीएस ने निर्देश दिए कि बीडीओ एवं जिला परिषद सीईओ से समन्वय स्थापित कर इन मानदेय कर्मियों को 30 नवम्बर तक भुगतान सुनिश्चित किया जाए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अन्य विभागों से संबंधित स्वीकृतियों एवं ट्यूबवैल के लंबित विद्युत कनेक्शन संबंधी मुद्दों को जिला कलेक्टर के समन्वय स्थापित कर निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अंतर्विभागीय प्रकरणों, विधानसभा में उठाए गए प्रश्नों के जवाब, वीआईपी पत्रों, राजस्थान संपर्क पोर्टल की शिकायतों, गुणवत्ता नियंत्रण टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण, अधिकारियों के दौरे, हैण्डपंप-ट्यूबवैल स्थापना आदि की भी बिंदुवार समीक्षा की।

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