पंचायतीराज संस्थाओं मे बढाई जाए आय।

जोधपुर-मनोज शर्मा।
राज्य वित्त आयोग (षष्ठम्) राजस्थान की पंचायतीराज संस्थाओं के साथ संभागस्तरीय बैठक जोधपुर जिला कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में हुई। इसमें आयोग के सदस्य डॉ. लक्ष्मणसिंह रावत, डॉ. अशोक लाहोटी, सदस्य सचिव एस.सी. देवाश्री, संयुक्त सचिव राजेश गुप्ता, वित्त आयोग सलाहकार शांतिलाल जैन एवं संभागीय आयुक्त कैलाशचन्द मीना आदि ने संबोधित करते हुए संभाग में पंचायतीराज संस्थाओं में राज्य एवं केन्द्रीय वित्त आयोग की गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में संभाग भर के जिला प्रमुख, प्रधान, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, विकास अधिकारी सहित संभागस्तरीय अघिकारी उपस्थित रहे। इसमें आयोग के संयुक्त सचिव राजेश गुप्ता ने पॉवर पोइन्ट प्रजेन्टेशन के माध्यम से आयोग के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली आदि पर विस्तार से जानकारी दी। आयोग के सदस्य डॉ. लक्ष्मणसिंह रावत ने कहा कि पंचायतीराज संस्थाओं से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों को आयोग के प्रतिवेदन में समाहित करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने उपस्थित सभी संभागियों से कहा कि वे अपने सुझाव लिखित रूप में अपने-अपने मुख्य कार्यकारी अधिकारी के माध्यम से आयोग को भिजवाएं, ताकि इन पर चिन्तन-मनन कर आयोग द्वारा नियमानुसार कार्यवाही संपादित की जा सके। 
सुशासन के साथ ग्राम्य विकास का बहुआयामी आदर्श दर्शाएं।
उन्होंने पंचायतीराज क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय कार्यों के मानदण्डों के बारे में जानकारी दी और कहा कि इस दिशा में श्रेष्ठ कार्य करने की व्यापक एवं असीम संभावनाआें को साकार कर अपने जिले की नई पहचान कायम करें। इसके लिए अपनी क्षमताओं और अधिकारों के प्रति जागरुक रहकर अधिक से अधिक उपयोग करें और सुशासन के साथ ही बहुआयामी विकास के आदर्श सामने लाएं। डॉ. रावत ने प्राप्त सुझावों में निजी आय में बढ़ोतरी के संबंध में सभी को जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम्यांचलों के पास अपने अखूट स्रोत हैं, जिनको सूचीबद्ध कर इनके उपयोग को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण विकास को नवीन स्वरूप प्रदान करने में भागीदारी निभाएं।
दृढ़ इच्छाशक्ति से करें योजनाओं का क्रियान्वयन।
उन्होंने इच्छाशक्ति, समझाईश एवं पहल पर जोर दिया और कहा कि इन पर ध्यान देते हुए जनसहभागिता से विकास की रफ्तार को और अधिक तेजी प्रदान कर सकते हैं। इसके लिए सभी स्रोतों व सहभागिता की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पारस्परिक सहयोग प्राप्त करने पर बल दिया। आयोग सदस्य ने पंचायतीराज संस्थाओं की आय बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध रूप से क्रियान्वयन करने, नियमित रूप से समीक्षा करने, मितव्ययता को ध्यान में रखते हुए कार्य संपादन करने आदि के निर्देश दिए।
उन्होंने स्टाफ की कमी, महानरेगा में भुगतान में हो रहे विलम्ब आदि की स्थिति के बारे में प्राप्त सुझावों पर चर्चा करते हुए कहा कि आयोग इस बारे में पहल करेगा।
पर्यावरण और ग्रामीण पर्यटन को दें रफ्तार।
आयोग सदस्य डॉ. अशोक लाहोटी ने महिलाओं की सहभागिता पर प्रसन्नता जाहिर की और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास में अधिकाधिक वृक्षारोपण एवं पर्यावरण गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान देने, मारवाड़ क्षेत्र में पर्यटन विकास की सभी संभावनाओं पर व्यापक विचार करते हुए कारगर गतितिविधियों को लागू करने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में कण-कण में पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावना है और इसके लिए ग्रामीण पर्यटन को अधिक से अधिक समृद्ध किए जाने की आवश्यकता है।
वस्तुस्थिति की जानकारी भिजवाने के निर्देश।
आयोग के सदस्य सचिव एस.सी. देराश्री ने कहा कि नई पंचायतों के भवन निर्माण की स्थितियों के बारे में वस्तुस्थिति की जानकारी प्रस्तुत करें और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुख-सुविधाओं, संसाधनों एवं सेवाओं की उपलब्धता से संबंधित अद्यतन जानकारी आयोग को भिजवाएं ताकि आयोग इस दिशा में कार्यवाही कर सके।
पंचायतीराज में वित्तीय अनुशासन बेहद जरूरी।
संभागीय आयुक्त कैलाशचन्द्र मीना ने पंचायतीराज संस्थाओं व ग्रामीण विकास के लिए जरूरी विषयों पर चर्चा करते हुए पंचायतीराज संस्थाओं में वित्तीय अनुशासन की अनिर्वायता की आवश्यकता जताई। उन्होंने आय वृद्धि के लिए पंचायतीराज के अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों आदि के मध्य समन्वय पर जोर दिया और कहा कि इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि अधिकारों के उपयोग के लिए इच्छाशक्ति अनिवार्य है और इसके बगैर अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ सकते। इसके लिए पंचायतीराज संस्थाओं से जुड़े लोगों को चाहिए कि लोक मंगल और ग्राम्य विकास के लिए सुदृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम करें और पंचायतीराज संस्थाएं भावी पीढ़ियों के लिए अपने स्वयं के संसाधन विकसित करें।
बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं पर विशेष फोकस।
संभागीय आयुक्त ने ग्रामीण विकास के लिए आधारभूत जरूरतों, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य केन्द्रों, स्कूलों सहित ग्रामीण अंचलों की संस्थाओं को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप विकसित करें। इससे नागरिक निर्माण के साथ ही ग्रामीण विकास को सम्बल प्राप्त होगा। बैठक में मुख्य रूप से सेवाओं के प्रदाय, संस्थाओं द्वारा किए गए तथा भावी कार्यों, आगामी कार्यों में जीपीडीपी की भूमिका, स्वयं के संसाधन जुटाते हुए आय वृद्धि, मूलभूत दायित्वों के निर्वहन, ऑडिट एवं लेखों, संस्थाओं की आय-व्यय तथा भावी जरूरतों, अनुकरणीय एवं उल्लेखनीय कार्यों, क्षता संवर्धन एवं जागरुकता संचार, संस्थाओं का सशक्तिकरण तथा हस्तान्तरित विभागों के कार्यों एवं अधिकारों के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में संभाग भर से आए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने अपने-अपने जिले में वित्त आयोग की गतिविधियों की जानकारी दी और महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी गई अहम् जानकारी।
बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य वित्त आयोग एवं केन्द्रीय वित्त आयोग की मद से वर्ष 2015-22 तक की अवधि में जोधपुर संभाग को प्राप्त राशि में जिला परिषदों को कुल 249.88 करोड़ की धनराशि मुहैया कराई गई। इनमें औसतन 5.95 करोड़ रुपए की धनराशि प्रत्येक जिला परिषद को प्रतिवर्ष उपलब्ध कराई गई। इसी प्रकार संभाग भर की पंचायत समितियों को कुल मिलाकर 984.54 करोड़ की धनराशि मुहैया कराई गई। इनमें से प्रत्येक पंचायत समिति को प्रति वर्ष औसतन  2.06 करोड़ की धनराशि मिली। बैठक में जानकारी दी गई कि संभाग भर की ग्राम पंचायतों को कुल मिलाकर 6426.41 करोड़ की धनराशि मुहैया कराई गई। इस हिसाब से प्रति ग्राम पंचायत प्रति वर्ष औसतन 0.44 करोड़ की राशि प्राप्त हुई।
बुधवार को शहरी निकायों की संभाग स्तरीय बैठक।
बुधवार 16 नवम्बर को राज्य वित्त आयोग (षष्ठम्) की शहरी निकायों के साथ संभागस्तरीय बैठक जोधपुर जिला कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में होगी।

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