भुगतान से पहले निर्माण कार्यो का भौतिक सत्यापन आवश्यक-मंत्री रमेश मीना।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
ग्रामीण विकास एवम पंचायती राज मंत्री रमेश चन्द मीना ने निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं में किए जा रहे कार्यों का भौतिक सत्यापन करने के उपरान्त ही उनके पेटे भुगतान करने की कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं पर प्रतिवर्ष 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि व्यय होती है, जिसका लाभ अंतिम छोर पर बैठे गांव के गरीब को मिलना चाहिए। ऐसे में राज्य स्तर एवं जिला स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से योजनाओें की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति सुनिश्चित की जानी आवश्यक है। मीना ने शासन सचिवालय के एसएसओ भवन सभागार में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में यह निर्देश प्रदान किए। नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, वाटरशेड, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, पन्द्रहवां वित्त आयोग, राजीविका, राज्य वित्त आयोग सहित विभिन्न योजनाओं की जिलेवार एवं बिन्दुवार चर्चा करते हुए अधिकारियों को अधिक से अधिक कार्यो का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करने को कहा। मीना ने पिछले कुछ माह में 16 जिलों के दौरों के दौरान अधिकारियों को दिए गए निर्देशों, प्राप्त हुई परिवेदनाओं एवं शिकायतों के आधार पर मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की। उन्होने समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि विभाग द्वारा गांवों में शहरों के समान साफ सफाई की व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं। कचरा एकत्रण से लेकर उनकी छंटाई और निस्तारण के लिए व्यावहारिक तरीके अपनाए जाएंगे। इसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र भूमिहीन व्यक्तियों को भामाशाह, एनजीओ या अन्य माध्यमों से भूमि उपलब्ध करवाकर आवास सुविधा प्रदान करने के कार्य को प्राथमिकता देने के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि रेगिस्तानी जिलों में वाटरशेड कार्यों में टांके बनाने का कार्य नहीं लिया जाए। वाटरशेड में भूजल स्तर वृद्धि और उनके संरक्षण एवं लघु सिंचाई योजनाओं, चारागाह विकास के कार्य को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महोदय की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर पर बैठे गांव के गरीब व्यक्ति को विभाग की योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। मीना ने एलडीसी भर्ती 2013 में विभिन्न जिलों में एकरूपता रखने, सार्वजनिक शौचालयों की सुचारू व्यवस्था, नरेगा जॉब कार्डों के अपडेशन, योजनाओें की निचले स्तर तक मॉनिटरिंग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, सभी योजनाओं में गाइडलाइन की पालना सहित अन्य विषयों पर मुख्य कार्यकारी अधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को अधिक से अधिक फील्ड विजिट के साथ ही विभाग के मोबाइल एप्स का इस्तेमाल करते हुए ऑनलाइन मॉनिटरिंग से जुड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि बिना किसी पूर्व सूचना एवं अनुमति विभागीय कर्मचारी अपना कार्यक्षेत्र नहीं छोडे़ं। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव मंजू राजपाल एवं पंचायती राज विभाग के सचिव नवीन जैन ने उनके विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी और इनमें गति लाने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान किए। बैठक में मनरेगा आयुक्त शिवांगी स्वर्णकार, पंचायती राज निदेशक डॉ. प्रतिभा सिंह सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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